जीडीपी वृद्धि दर जनवरी-मार्च 2022 की तिमाही में 4.1 प्रतिशत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 1 जून 2022

जीडीपी वृद्धि दर जनवरी-मार्च 2022 की तिमाही में 4.1 प्रतिशत

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नयी दिल्ली, 31 मई, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2022) में 4.1 प्रतिशत रही जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 2.5 प्रतिशत थी। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी। वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2021) में जीडीपी वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत थी। जीडीपी वृद्धि दर में नरमी ओमिक्रोन वायरस के संक्रमण की लहर और वैश्विक परिस्थितियों के कारण पैदा चुनौतियों के प्रभाव को दर्शाता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने मंगलवार को जीडीपी के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि वित्त वर्ष अप्रैल-मार्च 2021-22 में जीडीपी वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही। इससे पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते 6.6 प्रतिशत गिर गयी थी। इस बीच, वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.71 प्रतिशत के बराबर रहा जो वित्त मंत्रालय के संशोधित बजट अनुमान के 6.9 प्रतिशत से कम है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) ने एक रिपोर्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 (अप्रैल-मार्च) में राशि के हिसाब से राजकोषीय घाटा 15,86,537 करोड़ रुपये (अनुमानित) रहा। सीजीए की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के दौरान राजस्व घाटा जीडीपी के 4.37 प्रतिशत के बराबर रहा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021-22 के बजट में राजकोषीय घाटा 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में राजकोषीय घाटा 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वित्त वर्ष 2021-22 की आर्थिक वृद्धि दर सरकार के अनुमान से हल्की कम है। वित्त मंत्रालय ने फरवरी 2022 में वित्त वर्ष 2021-22 की वृद्धि दर 8.9 रहने का अनुमान लगाया था। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिर मूल्य (2011-12 के मूल्य स्तर पर) 2021-22 की चौथी तिमाही का सकल घरेलू उत्पाद 40.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में स्थिर मूल्य पर जीडीपी 39.18 लाख करोड़ रुपये था, जो इस बार चौथी तिमाही की वास्तविक जीडीपी में वार्षिक आधार पर 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।


वार्षिक आधार पर भारत का जीडीपी 2021-22 में अनुमानित 147.36 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2020-21 के प्रथम संसोधित अनुमान के अनुसार उस वर्ष में वास्तविक जीडीपी 135.58 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह 2021-22 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में सालाना आधार पर अनुमानित 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। वर्ष 2020-21 में वास्तविक जीडीपी उससे पिछले साल की तुलना में 6.6 प्रतिशत गिर गया था। जीडीपी के आज जारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान कीमत पर 2021-22 में जीडीपी में 19.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। वर्ष के दौरान वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। वर्ष 2021-22 में जीवीए में 4.8 प्रतिशत का संकुचन हुआ था। वर्ष के दौरान निजी अंतिम उपभोग व्यय 1.77 प्रतिशत बढ़कर जीडीपी के 56.9 प्रतिशत के बराबर पहुंच गया। जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 57.3 और कोविड पूर्व वर्ष 2019-20 के संशोधित अनुमान में 56.9 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान सरकारी अंतिम उपभोग व्यय जीडीपी के 10.7 प्रतिशत रहा जो वर्ष 2020-21 और 2019-20 के संसोधित अनुमान में क्रमशः 11.3 प्रतिशत और 10.2 प्रतिशत था। वर्ष 2021-22 के दौरान सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) जीडीपी के अनुमानित 32.5 प्रतिशत के बराबर रहा। जबकि 2019-20 के संशोधित अनुमान में जीएफसीएफ 31.8 प्रतिशत और 2020-21 में 20.5 प्रतिशत था। वर्ष 2021-22 में निर्यात जीडीपी के 21.5 प्रतिशत और आयात 26.3 प्रतिशत के बराबर रहा। वर्ष 2020-21 में निर्यात 18.8 और आयात 21.1 प्रतिशत रहा था। इससे पहले कोविड पूर्व के वर्ष 2019-20 में निर्यात जीडीपी के 19.4 प्रतिशत और आयात 22.9 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर तीसरी तिमाही के 2.5 प्रतिशत की तुलना में 4.1 प्रतिशत रही। खनन क्षेत्र की वृद्धि दर चौथी 6.7 प्रतिशत रही जबकि तीसरी तिमाही में यह 9.2 प्रतिशत थी। विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन चौथी तिमाही में 0.2 प्रतिशत घटा जबकि तीसरी तिमाही में इसमें सलाना आधार पर 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुयी थी। निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर तीसरी तिमाही के 2.8 प्रतिशत के मुकाबले 2.0 प्रतिशत रही। होटल, व्यापार, परिवहन और दूरसंचार क्षेत्र ने चौथी तिमाही 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि इससे पिछली तिमाही में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत थी। इस दौरान वित्तीय सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर तीसरी तिमाही के 4.2 प्रतिशत की तुलना में 4.3 प्रतिशत रही। 

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