प्रधानमंत्री देश हित के अलावा किसी और की चिंता नहीं करते : शाह - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 9 अगस्त 2022

प्रधानमंत्री देश हित के अलावा किसी और की चिंता नहीं करते : शाह

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नयी दिल्ली 08 अगस्त, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एक ऐसे एक आदर्शवादी नेता हैं जो देश के हित और गौरव के अलावा किसी और बात की चिंता नहीं करते। उन्होंने देश में लोकतंत्र की जड़ों को पाताल तक मजबूत करने का काम किया है। उड़ीसा चैप्टर के लॉंच पर मुख्य अतिथि गृहमंत्री अमित शाह ने आज अपने भाषण कहा कि श्री मोदी दूरदर्शी नेता हैं जो कभी टुकड़ों में नहीं सोचते बल्कि पूरा सोचते हैं दूर का सोचते हैं और पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी के अलावा इतनी सादगी के साथ जीने वाला राजनेता मैंने मेरे जीवन में नहीं देखा। समर्थ रामदास जी की ‘उपभोग शून्य स्वामी’ की कल्पना को इस युग में श्री मोदी ने चरितार्थ करने का काम किया है। इसी कारण से जनता उनका इतना सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी दीपक की लौ की तरह उद्व दिशा में ही सोचते हैं। जब एक व्यक्ति अपने परिवार को भुलाकर, जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण 130 करोड़ लोगों के कल्याण के लिए समर्पित कर सकता है, तभी नरेंद्र मोदी नाम का व्यक्ति बनता है। श्री मोदी ने एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में काम किया। मैं दावे से कह सकता हूँ कि जब भी चुनाव आता है तो देशभर में सबसे ज्यादा परिश्रम श्री नरेंद्र मोदी नाम का कार्यकर्ता करता है। और ऐसा कर्मठ कार्यकर्ता जब पार्टी का नेतृत्व करता है तो चुनावों में विजय सुनिश्चित हो जाती है। उन्होंने कहा कि वह परिश्रम की पराकाष्ठा करने वाले नेता हैं। मैंने उन्हें कभी थकते हुए नहीं देखा। वो कहते हैं कि उन्हें थकान नहीं लगती बल्कि जनता के हित के लिए किये परिश्रम से जब गरीब के चेहरे पर मुस्कान आती है तब हृदय में संतोष का भाव आता है। जब एक व्यक्ति अपने परिवार को भुलाकर, जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण 130 करोड़ लोगों के कल्याण के लिए समर्पित कर सकता है, तभी नरेंद्र मोदी नाम का व्यक्ति बनता है। श्री मोदी के एक स्टेट्समैन के रूप में पेरिस समझौते और दुनिया भर में योग दिवस मनाने के निर्णयों को हमने देखा है। यह बताता है कि जब भारत का नेता आत्मविश्वास के साथ दुनिया के मंच पर अपनी बात को रखता है तो इसकी स्वीकृति उतनी ही स्वाभाविक होती है जितनी बड़े से बड़े देश के नेता की होती है। 

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