प्रतापगढ़ : एडीजे तम्बोली द्वारा छात्रावासों का किया औचक निरीक्षण - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 24 अगस्त 2022

प्रतापगढ़ : एडीजे तम्बोली द्वारा छात्रावासों का किया औचक निरीक्षण

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प्रतापगढ़, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार, प्रतापगढ़ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नियमित रूप से जिले में संचालित  आवासीय छात्रावासों का निरीक्षण किया जा रहा है। इस क्रम में आज दिनांक 24.08.2022 को ग्राम कुलथाना में रानी देवली मीणा जनजाति बालिका छात्रावास एवं बालक छात्रावास का निरीक्षण किया गया। आज को प्राधिकरण सचिव शिवप्रसाद तम्बोली (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) द्वारा राजकीय रानी देवली मीणा जनजाति बालिका छात्रावास एवं रानी देवली मीणा जनजाति बालक छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। राजकीय रानी देवली मीणा जनजाति बालिका छात्रावास पर दौराने निरीक्षण अधीक्षिका, चौकीदार एवं कोच अनुपस्थित थीं। बच्चियां ही पाईं गई। मेन गेट पर ताला लगा हुआ था। जिसे छात्राओं ने स्वयं चाबी लाकर खोला। तत्काल छात्रावास अधीक्षिका से मोबाईल पर बात करके बुलाया गया तब वह करीब आधा घण्टे के पश्चात उपस्थित हुईं। कोच के बारे में पूछने पर छात्राओं ने बताया कि वह सुबह आकर 12ः00 पी0एम0 पर वापस चली गईं। अधीक्षिका ने भी बताया कि कोच यहां रूकती नहीं है और पढ़ाती भी नहीं है। छात्राओं ने ड्रेस, मौजे व बेग भी नहीं मिलना जाहिर किया। छात्रावास में कक्षा 06 से 12 तक की कुल 55 छात्राएं उपस्थित पाई गईं। उक्त अनियमितताओं को प्राधिकरण सचिव ने गम्भीरता से लिया। इस संबंध में टी0ए0डी0 उच्चाधिकारी को लिखा जा रहा है।  इसके पश्चात कुलथाना में ही स्थित रानी देवली मीणा बालक आश्रम छात्रावास का निरीक्षण किया गया। जहां पहॅूचने पर छात्रावास का मेन गेट खुला पाया और कईं छात्र बाहर बैठे मिले।  चौकीदार एवं छात्रावास अधीक्षक अन्दर मौजूद मिले। इस हेतु प्राधिकरण सचिव ने चौकीदार को गेट पर ही रहने तथा अकारण बच्चों को गेट से बाहर नहीं जाने देने हेतु निर्देश दिये। साथ ही अधीक्षक को बालकों को अनुशासित रखने और छात्रावास के नियमों का पालन करने हेतु निर्देश दिये। दौराने निरीक्षण उक्त दोनों ही छात्रावासों में बच्चों के रहने, खाने-पीने एवं साफ सफाई सहित अन्य सुविधाआंे का जायजा लिया गया। साफ-सफाई हेतु निर्देशित किया। बालक छात्रावास में बच्चों को नाश्ते में सिर्फ चने दिये गये, दूध नहीं दिया गया। बच्चों को तय मेन्यू के पालन में खाना व नाश्ता देने के लिये भी कहा। प्राधिकरण सचिव द्वारा छात्रावासों में संचालित उपस्थिति पंजिकाओं का अवलोकन किया। प्रतिज्ञा, मूलभूत कर्त्तव्य व विशेष दिवस छात्रावास में कहीं भी प्रदर्शित नहीं किये हुए हैं।  इसी दिवस छात्रावास में आवासीत छात्र-छात्राओं हेतु विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां प्राधिकरण सचिव ने विभिन्न विधिक जानकारियां प्रदान की। बाल विवाह निषेध कानून, मृत्यु भोज निषेध कानून, डाकन प्रथा के संबंध में कानून, राईट टू सिविल एक्ट आदि के बारे में विस्तार से बताया गया। जिला स्थाई लोक अदालत की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए जनोपयोगी सेवाओं- बैंक, बीमा, रोडवेज, पोस्ट ऑफीस, स्थानीय निकाय, लोक निर्माण विभाग, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, विद्युत विभाग, आवासन मण्डल, वित्तिय संस्थान, एल.पी.जी. सिलेण्डर प्रदाय कम्पनी की सेवाओं में दोष हो तो इन सभी के संबंध में स्थाई लोक अदालत में आवेदन किया जा सकता है। जो 60 से 90 दिवस में मामले का निस्तारण करती है और स्थाई लोक अदालत का निर्णय सिविल न्यायालय की डिक्री के समान होता है, जिसकी अपील नहीं होती है। छात्रावास में उपस्थित स्टॉफ को अपने छात्रावास परिसर में अधिकाधिक वृक्षारोपण हेतु भी प्रेरित किया गया। 

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