कविता : बेटियां - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा , झंडा ऊँचा रहे हमारा। देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनाएं व बधाई। 'लाइव आर्यावर्त' परिवार आज़ादी के उन तमाम वीर शहीदों और सेनानियों को कृतज्ञता पूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए नमन करता है। आइए , मिल कर एक समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। भारत माता की जय। जय हिन्द।

बुधवार, 21 सितंबर 2022

कविता : बेटियां

जिसे जन्म लेते ही मार डाला गया।


उसे इस संसार में आने से रोका गया।


क्यों होता है अक्सर बेटियों के साथ ऐसा?


क्यों बेटियों को समझा जाता है बोझ?


क्यों उनको कोसा जाता है?


तुम तो पराए घर की हो।


कह कर सताया जाता है।।


क्यों जन्म लेते ही उसे मार डाला जाता है?


क्यों उसे बोझ समझा जाता है?


बेटियां ही तो आज है, अगर बेटी नहीं होगी?


तो कल भी नहीं होगा।।


बेटियां इस संसार की शान हैं।


अब उन्हे बचाना मेरा अभिमान है।।


हिमानी दानू
हिमानी दानू

कपकोट, बागेश्वर

उत्तराखंड

(चरखा फीचर)

कोई टिप्पणी नहीं: