दरभंगा : प्राचीन भारत में विज्ञान कल्पित कथा अथवा वास्तविकता" विषय पर सेमिनार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा , झंडा ऊँचा रहे हमारा। देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनाएं व बधाई। 'लाइव आर्यावर्त' परिवार आज़ादी के उन तमाम वीर शहीदों और सेनानियों को कृतज्ञता पूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए नमन करता है। आइए , मिल कर एक समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। भारत माता की जय। जय हिन्द।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

दरभंगा : प्राचीन भारत में विज्ञान कल्पित कथा अथवा वास्तविकता" विषय पर सेमिनार

Seminar-in-lnmu-darbhanga
लनामिवि दरभंगा, आज दिनांक 8 दिसंबर 2022को राष्ट्रीय रसायन दिवस 2022 के आयोजन के श्रृंखला में "प्राचीन भारत में विज्ञान कल्पित कथा अथवा वास्तविकता" विषय पर एक सेमिनार सह प्रयोग प्रदर्शन का आयोजन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय रसायन विज्ञान विभाग में किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो० प्रेम मोहन मिश्र ने कहा कि प्राचीन भारत में विज्ञान का ज्ञान बहुत ही विकसित था। सिंधु घाटी सभ्यता के उत्खनन से उस समय के वैज्ञानिक ज्ञान का पता चलता है। कोणार्क के मंदिर, दिल्ली के महरौली के लौह स्तंभ भी इसके साक्षी हैं। उन्होंने वाराह मिहिर, ब्रह्मगुप्त, नागार्जुन, भास्कर, आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत व बोधायन आदि वैज्ञानिकों के अवदानों की चर्चा करते हुए कहा कि गणित, खगोल विज्ञान चिकित्सा, रसायन एवं धातु कर्म जैसे विषयों में भारतीय ज्ञान के कारण ही इसे विश्व गुरु माना जाता था। विदेशी आक्रमण एवं गुलामी के कारण हमारी वह वैज्ञानिक सोच समाप्त कर अंधविश्वास की धारणा का बीजारोपण कर दिया गया। आज की पीढ़ी मझधार में है। वह विज्ञान के अविष्कारों का उपयोग भी कर रहा है, साथ ही रूढ़िवादी विचारों को मन में संजोकर रखे हुए हैं। आज हम विज्ञान के दिए हुए कार पर चलकर बिल्ली के रास्ता काटने को अशुभ मानने का पूर्णतया अवैज्ञानिक विचार भी रखते हैं। उन्होंने नए बच्चों को वैज्ञानिक चेतना विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कोलकाता से आए विज्ञान संचालक चंचल बोस ने बहुत ही विस्तार से समाज में फैले अंधविश्वास की कई उदाहरणों से व्याख्या की। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग कर हाथ की सफाई दिखा कर लोगों को गुमराह करने वाले साधु वेश धारी द्वारा समाज को ठगने वालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने पानी से दिए जलाना, मुंह में आग रखना, चावल का मुरही बनाना व सादा कागज पर अपने आप फोटो बनाना जैसे कई करतब दिखाकर उपस्थित प्रतिभागियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जंतु विज्ञान विभाग के वरीय प्राचार्य मो० नेहाल ने जंतु विज्ञान सिद्धांत के आधार पर मानसिक संरचना का वर्णन कर विज्ञान एवं अंधविश्वास के अंतर को समझाया। अंत में वक्ताओं ने प्रतिभागी छात्रों के कई प्रश्नों का उत्तर देकर संतुष्ट किया। कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत प्रो० कुशेश्वर यादव ने किया उन्होंने भी अपने कई अनुभवों को साझा किया। धन्यवाद ज्ञापन विभागीय शिक्षक डॉ० विकास कुमार सोनू ने किया। ब्रेकथ्रू साइंस सोसायटी के संयोजक मुजोहिद आजम ने सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक छात्रों के अलावा कई स्कूली छात्रो-छात्राओं ने भी भाग लिया।

कोई टिप्पणी नहीं: