बिहार : 6 दशक पुरानी बागमती परियोजना का समग्र रिव्यू आवश्यक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 14 दिसंबर 2022

बिहार : 6 दशक पुरानी बागमती परियोजना का समग्र रिव्यू आवश्यक

  • 22-23 दिसंबर को रिव्यु कमिटी की होने वाली बैठक के लिए मांग पत्र तैयार करने पर चर्चा

Baghmati-project
मुजफ्फरपुर. लंबे चले आंदोलनों के बाद दशकों पुरानी बागमती बांध परियोजना के रिव्यू हेतु बिहार सरकार ने कमिटी का गठन किया था. हालांकि इस कमिटी को अपना सुझाव बहुत पहले दे देना था, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है. आगामी 22-23 दिसंबर को एक बार फिर से कमिटी की बैठक है. इसके मद्देनजर चास वास जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा की पटना में एक बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साथी देवेंद्र कुमार ने की. बैठक में मांगपत्र तैयार करने पर चर्चा हुई. और इस बीच जलसंसाधन मंत्री और विभागीय सचिव से एक प्रतिनिधिमंडल के मिलने का निर्णय हुआ. मोर्चा के संयोजक जितेन्द्र यादव के अलावा बैठक में खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा, नवल किशोर सिंह, जगरनाथ पासवान, मोनाजिर अहसन, रामलोचन सिंह,राम इकबाल राम, विवेक कुमार आदि शामिल हुए. वाटर एक्टिविस्ट रंजीव कुमार को पटना में कामकाज की जिम्मेवारी दी गई.  धीरेन्द्र झा ने कहा कि 6 दशक पुरानी परियोजना का समग्र रिव्यू जरूरी है क्योंकि नदियों की संरचना-बहाव में भारी बदलाव आए हैं. अपस्ट्रीम में जहां तटबंध बने हैं, उससे तबाही और बर्बादी बढ़ी है. बैठक से निर्णय लिया गया कि आंदोलन के दायरे का विस्तार दरभंगा-समस्तीपुर की ओर तक किया जाएगा क्योंकि योजना अब इन जिलों में भी लागू हो रही है. जितेन्द्र यादव ने कहा कि बिहार की जनता, जल विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों ने इस विनाश्कारी योजना का लगातार विरोध किया है.  यह पुरानी योजना अब अप्रासंगिक हो गई है. मुजफ्फरपुर जिले में जिस बागमती पर तटबंध बनाये जा रहे हैं, उन तटबंधों के दोनो ओर बागमती की कई छारण धराएं बह रही हंै. इस तरह तटबंध लाभ पहुंचाने के बदले अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रहे हैं. अतः हमारी मांग रही है कि बागमती परियोजना के तहत चल रहे तटबंध निर्माण पर तत्काल रोक लगाते हुए मौजूदा भौगोलिक स्थिति के आधार पर नए सिरे से परियोजना की समीक्षा का रिव्यू हो, जिसमें नदी विशेषज्ञ तथा स्थानीय नागरिकाें की सहभागिता सुनिश्चित की जाए.

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