मधुबनी : प्रलेस ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 26 दिसंबर 2022

मधुबनी : प्रलेस ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन

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मधुबनी, दिनांक 25 दिसंबर के अपराह्न में केंद्रीय पुस्तकालय मधुबनी के सभागार में मधुबनी ज़िला प्रलेस की ओर से काव्य गोष्ठी साहित्यश्री प्रीतम कुमार निषाद जी के सभापतित्व , अरविन्द प्रसाद के संचालन तथा विश्वबंधुजी के समीक्षकत्व में सम्पन्न हुई। गोष्ठी प्रभु यीशु ,श्रद्धेय पं. मदनमोहन मालवीय,अटल विहारी वाजपेयी एवं रामवृक्ष बेनीपुरी जी की स्मृति को समर्पित थी। गोष्ठी में लगभग दो दर्जन साहित्यकारों ने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान किया। गोष्ठी का आरंभ निषादजी की कविता --"आगत संवत्सर अभिनंदन"  के सस्वर वाचन से हुआ। झौली पासवान जी की रचना --"अप्पन हाथ जगन्नाथ"-- में मिथिला में बाढ़ की विभीषिका और उसके समाधान में मनुष्य की अपनी जिजीविषा को कवि ने बेहतरीन ढंग से दर्शाया। कवि उदयनाथ झा ने अपनी कविता --"हे कृष्ण, तेरी दुनिया क्यों अधूरी है?"-- में दुनिया में व्याप्त विद्रूपताओं को कारगर ढंग से उकेरा तो सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक सुखदेव राउत जी ने अपनी कविता--"मोन पड़ै यै..." में मिथिला के जनजीवन से गायब होती जा रही अनेक  वस्तुओं की खुशनुमा याद को ताजा कर दिया।वरिष्ठ अधिवक्ता कवि ऋषिदेव सिंह जी की कविता --"गुजरात चुनाव"--में हाल में सम्पन्न विधानसभा चुनावों में राजनेताओं के द्वारा राजनीतिक एवं नैतिक मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाने के कुकृत्य को उजागर किया गया तो डॉ. विजयशंकर पासवान की कविता--"क्या सुनाऊँ मैं उनकी कहानी?" --ने समाज के शोषित,पीड़ित और दमित लोगों की पीड़ा को रेखांकित किया। पत्रकार कवि सुभेषचंद्र झा की कविता--"देश हमारा धर्म है.." में देशहित की रक्षा को सर्वाधिक प्रमुख धर्म के रूप में दर्शाया गया तो अधिवक्ता कवि चंद्रपतिलाल विजय जी द्वारा वाचित कविता --"निर्वाण दिवस"--प्रभु यीशु के पवित्र वलिदान को याद दिलाया । अधिवक्ता विनय विश्वबंधुजी ने अपनी कविता में आगामी वर्ष में मानवसमुदाय के कल्याण हेतु ईश से प्रार्थना निवेदित की।पत्रकार सुनील आनंद ने अपने प्रेरक संदेश से श्रोताओं को काफी ऊर्जान्वित किया।  अरविन्द प्रसाद की कविता--"हम पुरुख छी"-- ने जहाँ एक ओर पति के पुरुषत्व को उजागर किया वहीं पत्नी के समक्ष उपस्थित होती विवशता को प्रभावी ढंग से उपस्थापित किया । लेखनाथ मिश्र जी के कवितावाचन एवं ज्योतिरमण झा (बाबा)के धन्यवादज्ञापन ने लोगों के मन में व्यापक ऊर्जा का संचार किया।

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