बिहार : हमारा लोकतंत्र है महान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

बिहार : हमारा लोकतंत्र है महान

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गया. यह बिहार है यहां पर लोकतंत्र काफी मजबूत है.यहां पर मनी पावर और गन पावर को पछाड़कर गण पावर ने वर्ष 1996 में स्टोन क्रशर भगवती देवी को लोकसभा में पहुंचाकर इतिहास रचा था.एक बार फिर बिहार के गया में मतदाताओं ने एक इतिहास रचा जब उन्होंने पिछले 40 वर्षों से मैला ढोने वाली एक महिला को शहर का डिप्टी मेयर चुना.


जब गया के लोगों ने मील का पत्थर साबित किया

बिहार के गया में मतदाताओं ने एक इतिहास रचा था.यहां पर 1996 का साल हर तरह से मील का पत्थर है.हिन्दू समाज में छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को दरकिनार करके अत्यधिक हाशिए पर रहने वाले मुसहर समुदाय की महिला और पेशे से स्टोन क्रशर भगवती देवी को भारी मतों से विजयी बनाया था. उसी साल शहर के मतदाताओं ने 1996 में भगवती देवी को लोकसभा के लिए चुना था, जो अत्यधिक हाशिए पर रहने वाले मुसहर समुदाय की महिला और पेशे से स्टोन क्रशर हैं.भगवती देवी ने नीतीश कुमार की जद (यू) के टिकट पर चुनाव लड़ा था. जनता दल (यूनाइटेड) से गया निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुनी गईं.


चिंता देवी गया की डिप्टी मेयर चुनी गई  

बिहार के गया में मतदाताओं ने एक बार फिर इतिहास रचा. बिहार नगर निकाय चुनाव (Bihar Municipal Election) में गया के मतदाताओं ने अभूतपूर्व फैसला सुनाते 40 वर्षों तक गया नगर निगम क्षेत्र में झाड़ू लगाने वाली महिला को डिप्टी मेयर (Gaya Deputy Mayor) की कुर्सी पर बैठा दिया. कहा जाता है कि पूरे गया में स्वच्छता का संदेश देने वाली चिंता देवी (Chinta Devi) अपने सिर पर मैला ढ़ोने का भी कार्य किया है.एक महिला को शहर का डिप्टी मेयर चुना.गया के नवनिर्वाचित मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने कहा, "गया एक ऐसी जगह है जहां लोग ज्ञान की तलाश करते हैं और यह वह जगह भी है जहां से एक मुसहर महिला लोकसभा में जा सकती है. इस बार यहां के लोगों ने एक उदाहरण पेश किया है, शायद जनता के लिए. चिंता देवी को चुनकर, जो मानव मल को अपने सिर पर ढोती थीं, जब यहां शौचालय कम थे, तब पूरी दुनिया ने सफाई कर्मचारी के रूप में काम किया.यह ऐतिहासिक है." 


एक मिसाल कायम

गया में बीते 28 दिसंबर को 77 वार्ड के मेयर, डिप्टी व पार्षद का चुनाव हुआ था. परिणाम 30 दिसंबर को आया. गया कॉलेज में बनाए गए मतगणना केंद्र में गया नगर निगम मतगणना पूरी हुई.इस दौरान मेयर में वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान की जीत हुई है. जहां उन्होंने श्यामदेव पासवान को हराया है.गया नगर निकाय चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की बेटी को करारी शिकस्त मिली है. इस बार मेयर पद पर गणेश पासवान ने जीत दर्ज की. जबकि डिप्टी मेयर पर चिंता देवी (62 वर्षीय) को जनता का समर्थन मिला है. चिंता देवी पेशे से सफाईकर्मी हुआ करती थी. “गया एक ऐसी जगह है जहाँ लोग आत्मज्ञान की तलाश करते हैं, और यह वह जगह भी है जहाँ से एक दलित महिला लोकसभा में जा सकती है.इस बार यहां के लोगों ने चिंता देवी को चुनकर शायद पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है, जो यहां शौचालय कम होने पर मैला ढोने का काम करती थीं.यह ऐतिहासिक है.' उन्होंने कुमारी दिव्या आंनद को हराया है.


भरा पूरा परिवार है

नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर चिंता देवी का घर शहर के माड़नपुर स्थित मंगलागौरी लट्टू गली में है.उनके घर जाने के लिए तंग गलियों से गुजरना पड़ता है.गली पूरी तरह से टूटी-फूटी है.चिंता देवी के घर में खाना लकड़ी चूल्हे पर बनता है.उज्ज्वला योजना के तहत गैस का कनेक्शन मिला है, लेकिन पैसे की अभाव में चूल्हे पर ही खाना बनता है. नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर है चिंता देवी.उनका भरा पूरा परिवार है.तीन पुत्रों में भोला मांझी, बबलू मांझी एवं मोहित कुमार है. वहीं, दो पुत्रवधु देवदंती देवी और सोनी देवी है. पुत्र भोला मांझी, बबलू मांझी एवं पुत्रवधु देवदंती देवी नगर निगम में दैनिक सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत हैं.


रिकॉर्ड मतों से प्राप्त की जीत

चिंता देवी भले पढ़ी लिखी नहीं हों, लेकिन पूरे क्षेत्र को स्वच्छता का ऐसा पाठ पढ़ाया कि लोग उनके मुरीद हो गए. चिंता पिछले 40 सालों से नगर निगम के सफाई कर्मी के रूप में काम कर रही थी. प्रतिदिन यह कचरा उठाने और झाड़ू लगाने का काम करती थीं. अब वे सब्जी बेचने का काम करती थीं, लेकिन इस बार गया नगर निगम का डिप्टी मेयर का पद आरक्षित होने के कारण चिंता देवी चुनावी मैदान में ताल ठोका और जनता का भरपूर समर्थन के साथ रिकॉर्ड मतों से विजय प्राप्त की. 


चिंता देवी ने निकिता रजक को 27 हजार से अधिक मतों से पराजित किया 

उप मेयर पद पर चिंता देवी को 50,417 मत मिले. इनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निकिता रजक को 22,494 मत मिले. चिंता देवी 27,923 मतों से विजयी हुईं.निगम क्षेत्र की मतदाताओं ने अधिकांश पुराने चेहरों को नाकार दिया.इस बार मतदाताओं ने अपने वार्ड में नए चेहरे पर भरोसा जताया है. नये चेहरे को वार्ड में सेवा करने का मौका दिया है.इस बार नगर निगम की 53 वार्ड में नए चेहरा सदन में दिखे.


पूर्व मेयर ने भी जारी किया बयान

गया के पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव बताते हैं कि चिंता देवी ने गया में मैला ढोने का काम भी किया था. उन्होंने कहा कि मैला ढोने वाली महिला ने डिप्टी मेयर के पद का चुनाव जीतकर इतिहास रचा है. उन्होंने कहा कि शहरवासियों ने दबे कुचले का समर्थन कर उन्हें समाज में आगे बढ़ाने का काम करते हैं. श्रीवास्तव ने कहा जिस तरह भगवती देवी भी सिर पर टोकरी ढोकर सांसद बनी थीं. अब चिंता देवी जो कि मैला ढोने वाली महिला के रूप में जानी जाती थी, अब डिप्टी मेयर के रूप में जानी जाएंगी.


2020 में रिटायर हुई थीं चिंता देवी 

चिंता देवी के पति का स्वर्गवास हो चुका है, लेकिन शहर को स्वच्छ रखने का अपना कार्य कभी नहीं छोड़ी. उन्होंने अपने दायित्व का ईमानदारी से पालन किया और लोगों के दिलों में अपना स्थान बना लिया. आज इसी का परिणाम है कि लोगों ने डिप्टी मेयर की कुर्सी तक पहुंचा कर यह भी संदेश दे दिया कि लोकतंत्र में सफाई कर्मचारी भी सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है. वर्ष 2020 तक चिंता देवी झाडू लगाती रहीं, उसके बाद जब वे सेवानिवृत्त हुईं तो सब्जी बेचने लगीं, लेकिन स्वच्छता को लेकर वे सजग रही.


जिस कार्यालय में झाड़ू लगाई, वहीं बनाएंगी योजना

चुनाव में मिले समर्थन से भावविभोर चिंता कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यहां तक की यात्रा भी कभी तय करूंगी. वे कहती हैं कि लोग इतना मान देंगे, नहीं सोचा था. अपना काम करते रहें तो जनता भी सम्मान देती है. जिस कार्यालय में झाडू लगाने वाली के रूप में कार्यरत थीं, अब वहीं से बैठकर शहर की स्वच्छता के लिए योजनाएं बनाएंगी.    


गया की डिप्टी मेयर चिंता देवी नहीं पढ़ सकीं शपथ पत्र

गया की डिप्टी मेयर बनीं चिंता देवी (Gaya deputy mayor Chinta Devi ) जीत के साथ ही सुर्खियों में रहीं. मैला ढोने से लेकर सब्जी बेचने और फिर डिप्टी मेयर बनने का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा. कम पढ़ी लिखी होने के कारण वे शपथ पत्र नहीं पढ़ सकीं. जिसके बाद डीएम डॉ.त्यागराजन एमएस ने शपथ पत्र पढ़ने में उनकी मदद की.हालांकि शपथ ग्रहण करते समय कई लोग लड़खड़ा जाते हैं.

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