मधुबनी : समाधान यात्रा में जिले की जीविका दीदियों के साथ सीएम ने किया संवाद - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 11 जनवरी 2023

मधुबनी : समाधान यात्रा में जिले की जीविका दीदियों के साथ सीएम ने किया संवाद

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मधुबनी, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज समाधान यात्रा के क्रम में मधुबनी जिले की जीविका दीदियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में जीविका दीदियों ने हिस्सा लिया। संवाद कार्यक्रम में विभिन्न जीविका समूह के माध्यम से कार्य करनेवाली 9 जीविका दीदियों ने अपने - अपने अनुभव मुख्यमंत्री के समक्ष साझा किये। जीविका दीदियों ने जीविका समूह से जुड़ने के बाद अपने जीवन स्तर में हुए बदलाव की चर्चा की। संवाद कार्यक्रम में जीविका दीदी ने मुख्यमंत्री को पौधा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। जीविका दीदी श्रीमती बबीता दीदी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि मधुबनी में गठित हुआ पहले जीविका समूह से जुड़नेवाली सदस्य हूं। समूह से जुड़ने के पहले रोजगार का कोई साधन नहीं था। पति मेहनत मजदूरी कर थोड़ा बहुत कमाते थे। वह पैसा भी बीमार ससुर के इलाज में खर्च हो जाता था। जब जीविका समूह से जुड़ी तो समूह से आर्थिक मदद मिली, पेंटिंग का काम शुरू किया उसके बाद 3-4 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी होने लगी। जीविका समूह के माध्यम से वे उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड राज्य भी गई। धीरे-धीरे बचत कर 2 लाख रुपये जमा की। वर्ष 2018 में अपने बेटे का एडमिशन बी0टेक में कराया, जिसे स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ भी मिला। आज उनका बेटा अमेजन कंपनी में नौकरी कर रहा है। जीविका समूह नहीं होता तो उनके बच्चे पढ़ नहीं पाते ।


जीविका दीदी श्रीमती मदीना खातून ने बताया कि वर्ष 2019 में वे जीविका समूह से जुड़ीं। मैं कभी मदरसा या स्कूल नहीं गई थीं लेकिन जीविका समूह से जुड़ने के बाद इतने अधिक उम्र में हस्ताक्षर करना सीखा। समूह से आर्थिक मदद मिलने पर कपड़ा दूकान खोली । अब प्रतिमाह 10-12 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। पहले परिवार के भरण-पोषण के लिये साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था। समूह से जुड़ने के बाद साहूकारों के कर्ज से मुक्ति मिली। अब बच्चे भी पढ़ रहे हैं। परिवार काफी खुशहाल है। जीविका समूह के लिये मैं माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रति अपना आभार प्रकट करती हूं। जीविका दीदी श्रीमती सुधा देवी ने बताया कि मैं मिथिला के सिक्की कला का काम करती थी और डलिया बनाती थीं, जिससे परिवार का किसी तरह गुजारा होता था। समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। मैं ग्राम संगठन की मीटिंग में शामिल होने लगीं। जीविका समूह से जुड़कर प्रशिक्षण लेने के बाद मैं नये-नये डिजाइन का सामान बनाने लगी, जिसकी मांग काफी बढ़ गई। 4-5 हजार रुपये प्रतिमाह आमदनी होने लगी। वर्ष 2013 में दिल्ली में बिहार की तरफ से प्रदर्शित होनेवाली झांकी में मुझे भाग लेने का मौका मिला। उससे मेरा मान सम्मान काफी बढ़ा। जीविका समूह हम सभी महिलाओं के लिये वरदान साबित हुआ है, इससे गरीब परिवारों का कल्याण हुआ है। मैं मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार प्रकट करती हूं। जीविका दीदी श्रीमती प्रमिला देवी ने बताया कि जीविका समूह से जुड़ने से पहले हमारा परिवार काफी कष्टप्रद जीवन गुजार रहा था। मेरे पति भी शराब पीते थे। मैं दूसरों के खेतों में काम कर किसी तरह परिवार का खर्च चलाती थी। समूह से जुड़ने के बाद जब मुझे आर्थिक मदद मिली तब फल की दूकान खोली । अब प्रतिदिन 4-5 सौ रुपये आमदनी हो जाती है। मैंने अपना कर्ज भी चुका दिया है। आज हमारे बच्चे पढ़ रहे हैं। अगर मैं समूह से नहीं जुड़ती तो मेरा कष्ट दूर नहीं होता। मैं मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार प्रकट करती हूं। जीविका दीदी श्रीमती अधिरा देवी ने बताया कि जीविका समूह से जुड़ने के बाद मुझे बांग्लादेश, राजस्थान, झारखंड और यू०पी० राज्य जाने का मौका मिला। समूह से आर्थिक मदद प्राप्त कर मैं श्रृंगार की दूकान भी चलाती हूं। यदि जीविका समूह न होता तो आज मुझे इस मंच पर आने का मौका नहीं मिलता। जीविका से हम महिलाओं को काफी सहयोग मिल रहा है। मैं मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूँ। जीविका दीदी श्रीमती मुन्नी देवी ने बताया कि जीविका समूह से जुड़ने से पहले मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी। पति लोहा कंपनी में काम करते थे । प्रति माह 2 हजार रूपये के करीब आमदनी होती थी, जैसे-तैसे बच्चों का पालन-पोषण होता था । समूह से जुड़ने के बाद मैंने आर्थिक मदद ली और सिलाई मशीन खरीदी। उसके बाद हम जीविका दीदियों ने मिलकर घर-आंगन सिलाई सेंटर खोला और खुद का प्रोडक्ट तैयार करने लगी। दिल्ली, कोलकाता और पटना में लगनेवाले सरस मेले में हमलोग स्टॉल भी लगवा चुके हैं। कोरोना काल में मुख्यमंत्री जी के आदेश के बाद हम जीविका दीदियों को मास्क बनाने का काम मिला, जिससे हम जीविका दीदियों को काफी आमदनी हुई। मुख्यमंत्री जी के हम बहुत आभारी हैं।


जीविका दीदी श्रीमती पुनीता देवी ने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद हमलोग स्वास्थ्य पोषण के क्षेत्र में लोगों को निरंतर जागरूक कर रहे हैं। वर्ष 2021 में हम जीविका दीदियां मिलकर 586 महिलाओं का सरकारी अस्पताल में प्रसव कराया। एक बच्चा कुपोषित होने के कारण चलने फिरने में असमर्थ था। मैंने अपने देख-रेख में उसके खान-पान का ध्यान रखा, जिसके कुछ माह बाद वह चलने लगा। जीविका समूह महिलाओं के लिये काफी लाभदायक साबित हुआ है। मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत आभार प्रकट करते हैं।


जीविका दीदी श्रीमती रंजू देवी ने बताया कि वर्ष 2006 में उनकी शादी हुई थी। पति दिल्ली में कमाता था और वहीं उसने अपनी दूसरी शादी कर ली। मैं पिता के घर रहने लगी। काफी परेशानी रहती थी। मैं जीविका समूह से जुड़कर सिलाई का प्रशिक्षण लेने के बाद समूह से आर्थिक मदद लेकर सिलाई सेंटर खोली। अब प्रतिमाह 5 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। पैसे बचत कर हमने गाय भी खरीदी है। जीविका समूह से जुड़कर मुझे नया जीवन मिला है। बेसहारा महिलाओं को जीविका समूह ने सहारा दिया है। मुझे नल-जल योजना, आवास योजना, राशन कार्ड और गैस योजना का निःशुल्क लाभ मिला है। मैं अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर रही हूं। जीविका दीदी श्रीमती अर्चना देवी ने बताया कि शराबबंदी के प्रति मैं लोगों को प्रेरित करती रहती हूं ताकि कोई गड़बड़ी नहीं कर सके। शराबबंदी से पहले मेरे गांव में अक्सर महिलाओं के साथ उनके शराबी पति मारपीट करते थे। गांव के नुक्कड़ चौराहे पर शराब पीने वाले झगड़ा और गाली-गलौज किया करते थे, जिससे माहौल काफी खराब रहता था। बच्चों पर इसका गलत प्रभाव पड़ता था। हम सभी जीविका दीदियों ने मिलकर एक दिन उसके दारू की भट्ठी को ध्वस्त कर दिया और चेताया कि फिर लगाओगे तो भट्ठी तोड़ देंगे। शराबबंदी लागू करने के लिये मैं मुख्यमंत्री जी के प्रति अपना आभार प्रकट करती हूं। शराबबंदी से गरीब-गुरबा परिवारों और हम सभी महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब घर में शांति है और दो जून की रोटी मिलने लगी है। दारू में जो पैसा बर्बाद होता था अब वो शिक्षा और स्वास्थ्य में खर्च हो रहा है। मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनायें लगभग बंद हो गई हैं। मुख्यमंत्री जी के प्रति मैं अपना आभार प्रकट करती हूं। जीविका दीदियों से संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान यात्रा के दौरान हम हर जगह जीविका दीदियों के साथ विचार-विमर्श करते हैं, उसी सिलसिले में आप सभी के साथ विचार-विमर्श करने के लिये हम यहां आये हैं। सबसे पहले मैं आप सभी को बधाई देता हूं। आपलोगों ने अपना अनुभव साझा किया है, यह बड़ी खुशी की बात है। वर्ष 2006 में ही हमने स्वयं सहायता समूह का विस्तार करने का निर्णय लिया था, उस समय स्वयं सहायता समूह की संख्या काफी कम थी। हमलोगों ने इसका नामकरण जीविका समूह किया। विश्व बैंक से कर्ज लेकर इस काम को आगे बढ़ाया गया। जीविका समूह के बारे में उस समय की केंद्र सरकार को जब मालूम हुआ तो केंद्रीय मंत्री बिहार आकर जीविका समूह के कामों को देखे और जीविका दीदियों से बातचीत कर वे काफी प्रसन्न हुए। इससे प्रभावित होकर भारत सरकार ने स्वयं सहायता समूह का नामकरण आजीविका किया। इसका मतलब है कि बिहार की जीविका पूरे देश में आ जाय। यह हमारे लिये बड़ी बात है। पहले परिवार में सिर्फ पुरुष ही काम करते थे अब महिलायें भी काम करने लगी हैं। इससे परिवार की स्थिति बेहतर हुई है। अब 10 लाख से अधिक जीविका समूहों का गठन हो गया है, जिससे लगभग 1 करोड़ 30 लाख महिलायें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक महिलाओं को जीविका समूहों से जोड़ें।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार गरीब राज्य है महिलाओं और पुरुषों के एक साथ मिलकर काम करने से बड़ा बदलाव आया है, स्थिति सुधर रही है। पिछले साल समाज सुधार अभियान के तहत हम 12 जगहों पर गये थे, जहां जीविका दीदियों के साथ सम्मेलन भी हुआ, उसमें जो बातें हुई उसको आगे बढ़ाया गया। महिलाओं के उत्थान के लिये हर प्रकार से काम किया जा रहा है। आप से बातचीत कर जीविका समूहों का और अधिक विस्तार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हम शराबबंदी लागू नहीं कर पाते लेकिन पटना में मीटिंग के दौरान जीविका दीदियों ने जब शराबबंदी लागू करने की मांग की तो हमने कहा कि अभी कुछ महीने बाद चुनाव है, मेरी सरकार बनेगी तो हम शराबबंदी लागू करेंगे। सरकार बनने के बाद मैंने शराबबंदी लागू की। सभी पार्टी के लोगों ने इसका समर्थन किया और इसके लिये संकल्प भी लिया। आज-कल वे अलग हो गये हैं तो कुछ-कुछ बोल रहे हैं। उस समय अलग रहकर भी वे समर्थन किये थे। मैं बराबर कहता हूं कि जहरीली शरब पियोगे तो मरोगे इसलिये शराब मत पीयो ये गंदी चीज है। वर्ष 2018 में एक सर्वे में यह बात सामने आई कि 1 करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया। हमने अधिकारियों को फिर कहा कि इसका सर्वेक्षण कराइये। हमने कह दिया है कि शराब का धंधा करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। शराब के कारोबार से जुड़े परिवारों को शराबबंदी के बाद अन्य रोजगार के लिये एक लाख रुपये की आर्थिक मदद सरकार दे रही है। जीविका दीदियां बेहतर काम कर रही हैं। जीविका दीदियों के कामों से गड़बड़ करने वाले लोगों को सीख लेनी चाहिये। उन्होंने कहा कि समाज में 10 प्रतिशत लोग गड़बड़ करने वाले होते हैं, उन्हें समझाना चाहिये कि वे ऐसा नहीं करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज सुधार अभियान के दौरान बापू की कही गई बातों को प्रकाशित कर लोगों में वितरित किया गया था। बापू ने कहा था कि शराब आदमियों से न सिर्फ उनका पैसा छीन लेती है बल्कि उसकी बुद्धि भी हर लेती है। शराब पीने वाला इनसान हैवान बन जाता है। देश को आजाद करवाने में बापू का अहम योगदान है। देश की आजादी का 76वां साल चल रहा है बापू की बातों को हम सभी को गंभीरता से लेनी चाहिये । वर्ष 2016 में हमलोगों ने शराबंदी लागू की और वर्ष 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में शराब पर सर्वेक्षण कराकर शराब से होनेवाले नुकसान के संबंध में रिपोर्ट जारी की, इसे सभी लोगों को बताना चाहिये। शराब पीने के कारण दुनिया भर में 5.3 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। 20 39 आयु वर्ग के नौजवानों की 13.5 प्रतिशत मौत शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियां होती हैं। जितनी मौतें गंभीर बीमारियों से लोगों की होती है, उससे ज्यादा शराब पीने के कारण होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह नहीं होना चाहिये, इसके लिये कानून बना हुआ है। 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी नहीं होनी चाहिये। 18 वर्ष से अधिक उम्र में लड़की की शादी होने पर बच्चे स्वस्थ होंगे। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। लड़केवालों को दहेज लेने का कोई औचित्य नहीं है। दहेज का लेन-देन करनेवालों का विरोध करना चाहिये। ऐसे शादी में शामिल होने से बचना चाहिये, इससे परिवार और समाज आगे बढ़ेगा। बच्चों को पढ़ाना बहुत आवश्यक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि लड़कियां पढ़ने लगीं तो बिहार का प्रजनन दर घटने लगा। एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि पति-पत्नी में पत्नी अगर पत्नी मैट्रिक पास है तो देश का औसत प्रजनन दर 2 है और बिहार का भी 2 है और यदि पत्नी इंटर पास तो देश भर का औसत प्रजनन दर 1.7, जबकि बिहार का 1.6 है। हमने कहा कि इस बात को अधिक से अधिक प्रचारित करिये। हमलोग हर पंचायत में +2 तक की पढ़ाई करने की व्यवस्था करा रहे हैं। शिक्षकों की बहाली की जा रही है। आप सभी जीविका दीदियों की यह जिम्मेवारी है कि अपने-अपने इलाके के विद्यालयों में यह देखें कि शिक्षक ठीक ढंग से पढ़ा रहे हैं या नहीं । यदि नहीं पढ़ा रहे हैं तो जिलाधिकारी को सूचित कीजिये। ऐसे लोगों की तनख्वाह रोक दी जायेगी। बच्चे अधिक से अधिक पढ़ें हम यही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की बहाली में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिसका परिणाम है कि आज बिहार पुलिस में जितनी महिलायें हैं, उतनी देश के किसी अन्य बड़े राज्य में नहीं हैं। सभी सरकारी सेवाओं, नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव में महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा है। महिलायें आगे बढ़ेंगी तभी समाज आगे बढ़ेगा। इंजीनियरिंग कॉलेजों में कम से कम एक तिहाई सीट महिलाओं के लिये आरक्षित है। जब हम इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते थे उस समय हमारे कॉलेज में एक भी लड़की नहीं पढ़ती थी। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम और भाईचारा का माहौल कायम रहे इसके लिये निरंतर प्रयास करते रहें। बिहार गरीब राज्य है इसके बावजूद भी यहां विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हर घर नल का जल योजना की शुरुआत बिहार में की गई तो केंद्र सरकार इस योजना के लिये बिहार को पैसा भी दे रही थी ताकि यह योजना केंद्र की हो जाय लेकिन हमलोगों ने मना कर दिया। हमारी जीविका दीदियां काबिल और योग्य हो रही हैं, यह बड़ी खुशी की बात है। जीविका समूह का गठन हुए आज 17 साल हो गये। अब जो भी आयेगा इस काम को आगे बढ़ायेगा। आपकी हर जरूरतों को पूर्ण किया जायेगा । आप बुलंदी के साथ काम करते रहिये और आगे बढ़िये । कार्यक्रम के दौरान वित्त, वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री सह मधुबनी जिले के प्रभारी मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री ललित कुमार यादव, उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ, परिवहन मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री बालामुरुगन डी०, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जीविका सह मिशन निदेशक जल - जीवन - हरियाली अभियान श्री राहुल कुमार, आयुक्त दरभंगा प्रमंडल डॉ० मनीष कुमार, जिलाधिकारी, मधुबनी श्री विशाल राज, पुलिस अधीक्षक मधुबनी श्री सुशील कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारीगण और जीविका दीदियां उपस्थित थीं । कार्यक्रम के पश्चात् मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हम बहुत पहले से यहां आकर एक-एक चीज को देखते रहे हैं। यह अब बनकर तैयार हो गया है। यहां अच्छे ढंग से सभी चीजों की ट्रेनिंग हो रही है। जीविका की दीदियां कितना अच्छा काम कर रही हैं। इनके द्वारा निर्मित चीजों की बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में भी बिक्री हो रही है । जीविका दीदियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया है कि इनके द्वारा तैयार सामान जापान में भी भेजी गई है। इनके द्वारा तैयार सामानों की ऑनलाइन बिक्री हो रही है। आज सभी जीविका दीदियां काफी खुश हैं। हमलोगों ने स्वयं सहायता समूह का जीविका नामाकरण करके इसे आगे बढ़ाया। आज जीविका दीदियों को देखकर काफी अच्छा लग रहा है। जीविका दीदियां काफी आगे बढ़ रही हैं। किसी भी जीविका दीदियों को देख लीजिए, आज कितनी खुश हैं। सभी अपना काम कर रही हैं यह कितनी खुशी की बात है। इस इलाके की कुछ खास चीजें हैं। मिथिला पेंटिंग काफी प्रसिद्ध है। तालाब में मछली डालने की जो परंपरा है उसके तहत हमने यहाॅ मछली डाली है। आंगनबाड़ी केंद्र में भी हमने जाकर देखा है और उसको लेकर निर्देश दिया है।

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