भाकपा-माले व अखिल भारतीय किसान महासभा की राज्यस्तरीय टीम ने किया चैसा का दौरा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 14 जनवरी 2023

भाकपा-माले व अखिल भारतीय किसान महासभा की राज्यस्तरीय टीम ने किया चैसा का दौरा

  • माले विधायकों ने किसानों की मांगों को विधानसभा के अंदर उठाने का दिया आश्वासन.
  • भाजपा के स्थानीय सांसद किसानों के उत्पीड़न पर मौन क्यों, जवाब दें.

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पटना 14 जनवरी, बक्सर के चैसा में किसानों पर बर्बर पुलिस दमन और उसके बाद किसान आंदोलन के उग्र हो जाने की घटना के तमाम पहलुओं की भाकपा-माले व किसान महासभा की उच्चस्तरीय टीम ने जांच की. जांच टीम में अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजा राम सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक मंजू प्रकाश, विधायक  अरुण सिंह, राष्ट्रीय सचिव व विधायक सुदामा प्रसाद, बिहार राज्य अध्यक्ष विशेश्वर प्रसाद यादव, राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य उमेश सिंह, पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह, अविनास पासवान, डुमरांव विधायक अजीत कुशवाहा के साथ-साथ अलख नारायण चैधरी, रामदेव यादव, जगनारायण शर्मा, नीरज कुमार और शिवजी राम शामिल थे. टीम ने बनारपुर गांव का दौरा किया जहां रात में सो रहे किसानों के ऊपर पुलिस ने लाठियां चलाई थी. महासचिव राजाराम सिंह ने बनारपुर में लगातार चल रहे किसानों के धरना कार्यक्रम को भी संबोधित किया और किसानों के आंदोलन और उनकी मांगों को राष्ट्रीय स्तर से ले कर बिहार के विधान सभा में प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया. कहा कि केंद्र की सरकार ने पहले कृषि कानून ला कर खेती और खेत को छीन लेने की कोशिश की, फिर अब जगह-जगह बिना मुआवजा के किसानों से जमीन छीनकर कंपनियों को देने की कोशिश कर रही है. हमे इसका डट कर मुकबला करना है. हम लड़ेंगे और जीतेंगे भी. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के स्थानीय सांसद मौन धारण किए हुए हैं. उन्हें जवाब देना होगा कि जमीन के मुआवजे की जगह उनके शांति पूर्ण धरना पर लाठी क्यों चलाई गई? उन पर झूठे मुकदमे क्यों लादे गए? केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार सरकार को भी जवाब देना होगा. उन्होंने किसानों से 15 फरवरी को पटना में होने वाली ‘लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ’ रैली में भाग लेने की भी अपील की. चैसा में निर्मित हो रहा थर्मल पावर प्लांट एनटीपीसी का प्रोजेक्ट है. वह अपनी सहयोगी कंपनी एसजीवीएन के जरिए निर्माण कार्य चला रही है. इसके लिए 2010-11 में ही लगभग एक हजार एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. तय हुआ था कि 36 लाख रु. प्रति एकड़ की दर से जमीन का मुआवजा मिलेगा, लेकिन अपने वादे से मुकरते हुए सरकार महज 28 लाख रु. प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देेने लगी. किसानों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. 50 प्रतिशत से अधिक किसानों ने मुआवजा नहीं लिया. किसान महासभा व भाकपा माले आंदोलन की सभी मांगों का समर्थन करते हुए दमन की घटना के जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करती है. प्रशासन को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तरीके से खुश करके कंपनी किसानों का गला घोंट रही है. यह बेहद संगीन मामला है. अतः इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.

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