सीहोर : भगवान को पाना सरल है लेकिन भगवान की भक्ति मिलना कठिन है - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 3 जनवरी 2025

सीहोर : भगवान को पाना सरल है लेकिन भगवान की भक्ति मिलना कठिन है

  • सूदजी से 88 हजार संत कथा सुनने आते थे, अब श्रौता कथा वाचक को प्रतिक्षा कराते है- पं तिवारी  
  • घौर कलयुग होगा तब भगवान कल्की पृथ्वी पर लेंगे अवतार- तिवारी
  • हनुमान फाटक मंदिर परिसर कस्बा में आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा महापूराण का दूसरा दिन

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सीहोर। हनुमान फाटक मंदिर परिसर कस्बा में आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा महापूराण के दूसरे दिन शुक्रवार को भागवत भूषण पंडित रवि शंकर तिवारी ने श्रद्धालुओं के मध्य राजा परिक्षित कथा सुनाते हुए कहा की कलयुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का है जब चने के पौधे के नीचे बैठक होगी और 21 वर्ष की युवती दादी बनने लगेगा तब घौर कलयुग होगा तब भगवान कल्की अवतार पृथ्वी पर होगा।


 कथा सुनने आने में करते है आलस 

पं तिवारी ने कहा की कलयुग में लोग भागवत कथा सुनने आने में आलस करते है जबकी पूर्वकाल में जब सूदजी महाराज भगवान की कथा सुनाते थे तो नेमिशरण में 88 हजार संत पहले से आकर विराजमान हो जाते थे किंन्तू अब भगवान की कथा करने वाले को श्रौताओं की प्रतिक्षा करनी होती है। धु्रव प्रसंग सुनाते हुए उन्होने कहा की काफी कम आयू में धु्रव को भगवान मिल गए थे परंतू भक्ति नहीं मिलती थी जिस कारण वह हिंसक बने हुए थे सत्संग और भगवान के सुमिरन से ही भगवान की भक्ति मिल सकती है भक्ति मिलने का और कोई दूसरा उपाए नही है भगवान की सेवा में मन लगना हीं भक्ति मिलने का प्रमाण है।

 

  लोग डर के कारण करते है सोलह श्राद 

व्यास गादी से पं तिवारी ने तर्पण की महीमा बताते हुए कहा की अधिकांश लोग डर के कारण सोलह श्राद करते है गयाजी पितरों को तारने नहीं पितरों से पिंड छुड़ाने जाते है। जबकी हिन्दू सनातन शास्त्र कहते है की पितर देवताओं की शरण में होते है आपके द्वारा पितरों के लिए किया गया तर्पण पितरों के साथ देवताओंं को भी प्राप्त होता है हमेशा भगवान और पितरों पूर्वजों की हम पर कृपा बनी रहे इस लिए भोग लगाते रहना चाहिए पितरों को तर्पण करते रहना चाहिए।  


हर स्थिति में प्रभु के साथ रहना चाहिए 

भागवत भूषण पंडित रवि शंकर तिवारी ने कहा की भक्त को हर स्थिति में प्रभु के साथ रहना चाहिए दुख का भी स्वागत करना चाहिए और सुख के लिए भी भगवान को धन्यवाद करना चाहिए। भगवान से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करना चाहिए लेकिन अर्चना के फल देने या नहीं देने की जिम्मेदारी भगवान पर ही छोड़ देना चाहिए क्योकी बचाने वाले भी भगवान है और मारने वाले भी भगवान है जिस पर प्रभु की कृपा होती है उसे कोई नही मार सकता है और प्रभू ने जिस को अपने पास बुला लिया उस को कोई रोक भी नहीं सकता है।


श्रद्धालुओं को दिखाया भक्ति का मार्ग 

श्रीमद भागवत कथा पूराण के दौरान भागवत भूषण पं तिवारी ने विभिन्न कथा प्रसंगों और मधुर संगीतमय भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति का मार्ग दिखाया। मुख्य यजमानों के द्वारा भागवतजी की पूजा अर्चना की गई और प्रसाद का वितरण किया गया। कथा सुनने ंके लिए शहर सहित आसपास के गांवों से भी नागरिक हनुमान फाटक मंदिर परिसर पंडाल में पहुंच रहे है। कथा प्रतिदिन दोपहर एक से शाम चार बजे तक हो रही है।

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