प्रो झा ने समारपात्र में कहा है जब देश में भाषा के आधार पर छोटे छोटे छोटे राज्य का निर्माण किया जा रहा है तो मिथिला को भी चौमुखी विकास के लिए एकमात्र निदान मिथिलाराज्य है उन्होंने प्राइमरी शिक्षा में मैथिली को शामिल करना , मैथिली शिक्षकों की बहाली, मैथिली पुस्तकें की छपाई बंद है , जब बिहार में कांग्रेस की सरकार थी तो सरकारी स्कूलों में हिंदी , मैथिली एवं उर्दू अनिवार्य विषय के रूप में शामिल था जिसे नीतीश बीजेपी सरकार ने 2008 मैथिली भाषांकों हटाकर बंगला भाषा को शामिल कर दिया जो मिथिलावासियों का अपमान है जिसे पुनः शामिल करना , सीबीएससी में मैथिली भाषा को शामिल करना , बीपीएससी में मैथिली भाषा को अप्रासंगिक मात्र एक सौ अंकों में सीमित कर दिया गया।
मिथिला क्षेत्र के बंद पड़े उद्योगों पंडौल , सकरी , लोहट चीनी मिलें , पंडौल का सुता फैक्ट्री , गुलकोज एवं चमड़ा उद्योग, अशोक पेपर मिल , जुट मिल को पुनः चालू करने के दिशा में जोरदार पहल करने, मिथिला के प्रसिद्द मखान , मछली एवं मिथिला पेंटिंग आधारित उद्योगों पर पहल , मिथिला क्षेत्र में आई आई एम , आई आई टी एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना , बाढ़ एवं सुखाड़, दरभंगा को बिहार के द्वितीय राजधानी घोषित करना , हाईकोर्ट की एक बेंच दरभंगा में खोलना पर यदि पार्टी मुखर आवाज बनती है तो पार्टी को काफी मजबूती मिलेगी। प्रो झा ने सभी दलों के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को आह्वान किया है कि अपने अपने पार्टी में विभिन्न स्तरों पर हिम्मत कर आवाज उठाएं ताकि आपके मिथिला का चौमुखी विकास हो सके।

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