पटना : वाम दलों द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में एकजुटता दिवस - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 18 जून 2025

पटना : वाम दलों द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में एकजुटता दिवस

  • भारत की जनता जनसंहार, रंगभेद या साम्राज्यवादी युद्ध के पक्ष में खड़ी नहीं होगी

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पटना (रजनीश के झा) फिलिस्तीन जनता के साथ राष्ट्रीय एकजुटता दिवस मनाने के आह्वान के तहत आज पूरे बिहार में वाम दल - भाकपा (माले), सीपीआई, सीपीएम, फारवर्ड ब्लॉक व आरएसपी की ओर से संयुक्त प्रदर्शन आयोजित किए गए. प्रदर्शन में इजरायली सरकार द्वारा गाजा में किए जा रहे जनसंहार की भर्त्सना की गई और ईरान समेत इस पूरे क्षेत्र में इजरायल-अमेरिकी साम्राज्यवादी गठजोड़ द्वारा जारी सैन्य आक्रमण की निंदा की गई. प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि इस गठजोड़ का विस्तार पश्चिम एशिया में शांति, न्याय और संप्रभुता के खिलाफ गहरा खतरा है. राजधानी पटना में जीपीओ गोलंबर से मार्च निकला और बुद्ध स्मृति पार्क के पास प्रतिरोध सभा हुई. पटना के अलावा गया, बिहारशरीफ, बेगूसराय, नवादा, मोतिहारी, दरभंगा, सासाराम, आरा, सिवान, बेतिया, अरवल, जहानाबाद आदि केंद्रों पर भी वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने फिलिस्तीन के समर्थन में मार्च निकाले. प्रदर्शन को संबोध्ति करते हुए ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने अन्य वामपंथी नेताओं के साथ प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि फिलीस्तनी लोगों और साम्राज्यवाद व औपनिवेशिक प्रभुत्व का प्रतिरोध कर रहे तमाम लोगों के साथ व्यापक एकजुटता का आह्वान किया. कहा कि इस मामले में मोदी सरकार की खामोशी की तीव्र निंदा की. इसे युद्ध अपराधों के साथ मिलीभगत करार दिया. माले विधायक दल नेता महबूब आलम ने कहा कि मोदी सरकार ने भारत के ऐतिहासिक उपेनिवेशवाद व साम्राज्यवाद विरोधी व फिलिस्तीन समर्थन की अपनी नीति के साथ दगाबाजी कर रही है. उन्होंने भारत के लोगों से इस बदलाव को खारिज करने और राष्ट्रीय मुक्ति के संघर्षों के साथ एकजुटता की गौरवमयी विरासत को बुलंद करने का आह्वान किया. प्रदर्शन को सीपीआई की निवेदिता झा व रामबाबू कुमार, सीपीएम के अरूण मिश्रा व सर्वोदय शर्मा, पीयूसीएल के सरफराज आदि ने संबोधित किया. प्रदर्शन में माले राज्य सचिव कुणाल, सीपीआई के गजनफर नवाब, कमलेश शर्मा आदि शामिल थे. वाम दलों ने घोषणा की कि भारत के लोग जनसंहार, रंगभेद या साम्राज्यवादी युद्ध के पक्ष में खड़े नहीं होंगे और भारत की उपनिवेशवादी और न्याय पक्षीय विदेश नीति की परंपरा को पुनः हासिल करने और उसका पक्षपोषण का आह्वान किया.

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