- पत्रकार अजीत अंजुम पर एफआईआर के खिलाफ पटना में नागरिक प्रतिवाद मार्च
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने दावा किया था कि प्रक्रिया निष्पक्ष होगी, लेकिन अब अचानक कहा जा रहा है कि 35 लाख नामों को हटाया जाएगा। यह आंकड़ा कहां से आ गया? अभी तो 26 जुलाई तक तो गणना प्रोफॉर्मा ही भरवाए जाएंगे, उसके बाद दस्तावेजों की जांच होगी। ऐसे में इस तरह का आंकड़ा सामने लाकर वोट काटने का माहौल बनाने की साजिश हो रही है। यदि ऐसा हुआ तो हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 20-25 हज़ार नाम काट दिए जाएंगे, जो अधिकांशतः गरीब, दलित, प्रवासी मजदूर और मुसलमान समुदाय से होंगे। का. दीपंकर ने आगे कहा कि सूत्रों के हवाले से बांग्लादेशी, म्यांमार और नेपालियों की घुसपैठ का झूठ फैलाया जा रहा है। 2019 में चुनाव आयोग ने संसद को बताया था कि 2016-19 के बीच विदेशी मतदाता की कोई पुष्टि नहीं हुई। केवल 2018 में 3 ऐसी शिकायतें थीं। एक शिकायत गुजरात से, एक तेलंगाना से और एक पश्चिम बंगाल से। ऐसे में बिहार में 2025 में कहां से विदेशी मिल रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिहार के मुसहरों, प्रवासी मजदूरों, झुग्गीवासियों और मुसलमानों को विदेशी करार देकर वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है?बिहार के गांव-गांव में मुसहर मिलेंगे, क्या उन्हें म्यांमार का बना दे रहे हैं? बिहार के प्रवासी मजदूरों व मुसलमानों को बांग्लादेशी बोल दे रहे हैं। यह तो बंगाल के प्रवासी मजदूरों की समस्या है। उन्हें देश के दूसरे हिस्से में बांग्लादेशी कहा जा रहा है बांग्ला भाषा के कारण। दिल्ली में विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने नारा दिया था - जहां झुग्गी वहीं मकान। भाजपा अब क्या कर रही है? जहां झुग्गी वहीं बुलडोजर! और यह बुलडोजर किसपर चल रहा है? वे बिहार के ही तो मजदूर हैं।
अब हिंदी बोलने वाले मजदूर भी बांग्लादेशी कैसे हो गए? यह लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश हो रही है। नेपाल के साथ बेटी-रोटी का रिश्ता है। हमारी हर आशंका एक-एक दिन करके पुष्टि हो रही है। यह संविधान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हमारे साथी भी घर-घर जा रहे हैं। चुनाव आयोग हर बार याद दिलाता है कि डॉक्यूमेंट देना ही होगा। अभी नहीं तो अगस्त में देना होगा। बिहार के गरीबों के पास कौन दस्तावेज हैं? यहां के लोगों को जो दस्तावेज मिल सकते हैं वह है आवासीय व जाति प्रमाण पत्र। वह मिल नहीं रहा है। नागरिक प्रतिवाद को माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, एमएलसी शशि यादव आदि नेताओं ने भी संबोधित किया और एसआईर को तत्काल वापस लेने की मांग की. कहा कि विधानमंडल के सत्र में इसके खिलाफ माले व इंडिया गठबंधन मजबूती से उठाएगा. प्रतिवाद सभा का संचालन एआइपीएफ के कमलेश शर्मा ने किया. नागरिक प्रतिवाद मार्च में माले पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर, धीरेन्द्र झा, वरिष्ठ पार्टी नेता केडी यादव, अभ्युदय, ऐपवा की अनीता सिन्हा, ऐक्टू के रणविजय कुमार, प्रकाश कुमार, इंसाफ मंच के लखन चौधरी, जितेन्द्र कुमार, दिव्या गौतम, नसरीन बानो, आफशा जबीं, कमलेश कुमार, अनुराधा देवी, पन्नालाल, संजय यादव, विनय कुमार, अनय मेहता, पुनीत पाठक, प्रमोद यादव, विभा गुप्ता आदि उपस्थित थे.

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