पटना : न एसआईआर और न उसके नाम पर एफआईआर : दीपंकर भट्टाचार्य - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

पटना : न एसआईआर और न उसके नाम पर एफआईआर : दीपंकर भट्टाचार्य

  • पत्रकार अजीत अंजुम पर एफआईआर के खिलाफ पटना में नागरिक प्रतिवाद मार्च

Deepankar-bhattacharya-cpi-ml
पटना, 18 जुलाई (रजनीश के झा)। बिहार में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े को उजागर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम पर एफआईआर दर्ज किए जाने के खिलाफ आज पटना में व्यापक नागरिक प्रतिवाद मार्च निकाला गया। यह मार्च जीपीओ गोलंबर से शुरू होकर स्टेशन गोलंबर तक गया और फिर वहां प्रतिवाद सभा आयोजित हुई। मार्च में भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, एमएलसी शशि यादव, और कई संगठनों के कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, छात्र-युवा शामिल हुए। मार्च के दौरान लोग - एसआईआर वापस लो, अजीत अंजुम पर एफआईआर क्यों - जवाब दो, चुनाव चोर, गद्दी छोड़ आदि नारे लगा रहे थे। प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में जो एसआईआर के नाम पर चल रहा है, वह दरअसल एक सोची-समझी वोटबंदी की साजिश है। 9 जुलाई को बिहार की जनता ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि यह प्रक्रिया उन्हें मंज़ूर नहीं। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने और रिसिविंग देने की बात की गई थी, पर ज़मीन पर भारी फर्जीवाड़ा हो रहा है। इसी को उजागर करने पर पत्रकार अजीत अंजुम पर एफआईआर कर दी गई। हमें न एसआईआर चाहिए, न उसके नाम पर एफआईआर।


उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने दावा किया था कि प्रक्रिया निष्पक्ष होगी, लेकिन अब अचानक कहा जा रहा है कि 35 लाख नामों को हटाया जाएगा। यह आंकड़ा कहां से आ गया? अभी तो 26 जुलाई तक तो गणना प्रोफॉर्मा ही भरवाए जाएंगे, उसके बाद दस्तावेजों की जांच होगी। ऐसे में इस तरह का आंकड़ा सामने लाकर वोट काटने का माहौल बनाने की साजिश हो रही है। यदि ऐसा हुआ तो हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 20-25 हज़ार नाम काट दिए जाएंगे, जो अधिकांशतः गरीब, दलित, प्रवासी मजदूर और मुसलमान समुदाय से होंगे। का. दीपंकर ने आगे कहा कि सूत्रों के हवाले से बांग्लादेशी, म्यांमार और नेपालियों की घुसपैठ का झूठ फैलाया जा रहा है। 2019 में चुनाव आयोग ने संसद को बताया था कि 2016-19 के बीच विदेशी मतदाता की कोई पुष्टि नहीं हुई। केवल 2018 में 3 ऐसी शिकायतें थीं। एक शिकायत गुजरात से, एक तेलंगाना से और एक पश्चिम बंगाल से। ऐसे में बिहार में 2025 में कहां से विदेशी मिल रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिहार के मुसहरों, प्रवासी मजदूरों, झुग्गीवासियों और मुसलमानों को विदेशी करार देकर वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है?बिहार के गांव-गांव में मुसहर मिलेंगे, क्या उन्हें म्यांमार का बना दे रहे हैं? बिहार के प्रवासी मजदूरों व मुसलमानों को बांग्लादेशी बोल दे रहे हैं। यह तो बंगाल के प्रवासी मजदूरों की समस्या है। उन्हें देश के दूसरे हिस्से में बांग्लादेशी कहा जा रहा है बांग्ला भाषा के कारण। दिल्ली में विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने नारा दिया था - जहां झुग्गी वहीं मकान। भाजपा अब क्या कर रही है? जहां झुग्गी वहीं बुलडोजर! और यह बुलडोजर किसपर चल रहा है? वे बिहार के ही तो मजदूर हैं।


अब हिंदी बोलने वाले मजदूर भी बांग्लादेशी कैसे हो गए? यह लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश हो रही है। नेपाल के साथ बेटी-रोटी का रिश्ता है। हमारी हर आशंका एक-एक दिन करके पुष्टि हो रही है। यह संविधान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हमारे साथी भी घर-घर जा रहे हैं। चुनाव आयोग हर बार याद दिलाता है कि डॉक्यूमेंट देना ही होगा। अभी नहीं तो अगस्त में देना होगा। बिहार के गरीबों के पास कौन दस्तावेज हैं? यहां के लोगों को जो दस्तावेज मिल सकते हैं वह है आवासीय व जाति प्रमाण पत्र। वह मिल नहीं रहा है। नागरिक प्रतिवाद को माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, एमएलसी शशि यादव आदि नेताओं ने भी संबोधित किया और एसआईर को तत्काल वापस लेने की मांग की. कहा कि विधानमंडल के सत्र में इसके खिलाफ माले व इंडिया गठबंधन मजबूती से उठाएगा. प्रतिवाद सभा का संचालन एआइपीएफ के कमलेश शर्मा ने किया. नागरिक प्रतिवाद मार्च में माले पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर, धीरेन्द्र झा, वरिष्ठ पार्टी नेता केडी यादव, अभ्युदय, ऐपवा की अनीता सिन्हा, ऐक्टू के रणविजय कुमार, प्रकाश कुमार, इंसाफ मंच के लखन चौधरी, जितेन्द्र कुमार, दिव्या गौतम, नसरीन बानो, आफशा जबीं, कमलेश कुमार, अनुराधा देवी, पन्नालाल, संजय यादव, विनय कुमार, अनय मेहता, पुनीत पाठक, प्रमोद यादव, विभा गुप्ता आदि उपस्थित थे.

कोई टिप्पणी नहीं: