भोपाल : प्रियंका को ‘विश्व साहित्य सम्मान‘, शब्द को शब्द से ऐसे जोड़ा कि सुनने वाले कहने लगे ‘‘वाह!’’ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 7 जुलाई 2025

भोपाल : प्रियंका को ‘विश्व साहित्य सम्मान‘, शब्द को शब्द से ऐसे जोड़ा कि सुनने वाले कहने लगे ‘‘वाह!’’

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भोपाल। उन्होंने शब्दों को कुछ इस तरह पिरोया कि सबके मन को भा गया। लोगों को कविता सुनना इतना अच्छा लगा कि जिस मंच पर कविता पढ़ दी, उसी मंच पर डॉ. प्रियंका ‘‘प्रियांजलि’’ को सम्मानित किया जाने लगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सम्मान प्राप्त करने वाली राजधानी की कवयित्री  डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ‘प्रियांजलि‘ को अब ‘विश्व साहित्य सम्मान-2025‘ से सम्मानित किया गया। निर्दलीय संगठन के 52वें वार्षिकोत्सव में भोपाल निवासी डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ‘प्रियांजलि‘ को वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। अब तक इन्हें अनेक राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों द्वारा विभिन्न सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।


संस्था, प्रति वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभाओं का सम्मान करती है। इस वार्षिकोत्सव में राष्ट्रीय शिखर सम्मान एवं विश्व साहित्य सम्मान के अंतर्गत 101 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया है। इससे पूर्व डॉ. प्रियंका ‘‘प्रियांजलि’’ को ‘‘स्त्री’’ विषय पर उनकी विभिन्न दृष्टिकोणों पर आधारित पांच रचनाओं के लिए ‘‘विश्व हिंदी रचनाकार मंच’’ द्वारा राजधानी के हिंदी भवन में ‘‘रानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल अवॉर्ड’’ से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें अटल गौरव अवार्ड, निर्भया सम्मान राष्ट्रीय शब्दाक्षर प्रतीक चिन्ह, कायस्थ कुलभूषण सम्मान और प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. प्रियंका प्रियांजलि ने साहित्यिक संगठनों, अपने कवि मित्रों, परिवार और प्रशंसकों के समर्थन के लिए, सभी की शुभकामनाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनकी रचनाओं को सराहा और पसंद किया, जिससे उन्हें और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा मिल सकी। जिन्होंने लेखन और वाचन कला में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन सभी के प्रति उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ. प्रियंका प्रियांजलि ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि अपनी रचनाओं के माध्यम से राजभाषा हिंदी के उन्नयन के लिए कार्य करना तथा हिंदी का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करना उनका उद्देश्य है। वर्तमान समय में अनेक गैर हिंदी राज्यों के लोगों को भी हिंदी से जोड़ना है और उनमें हिंदी साहित्य के प्रति रूचि जाग्रत करना है। इसके लिए नवांकुर साहित्य मनीषियों को हिंदी भाषा में सृजन के लिए प्रेरित किया जा  रहा है।

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