कोलकाता, (आलोक कुमार). सर्वप्रथम मदर टेरेसा अपने पल्ली में एक जेसुइट पादरी द्वारा संचालित सोडालिटी नामक एक युवा समूह में शामिल हुईं और इसी में उनकी भागीदारी ने उन्हें एक मिशनरी नन के रूप में सेवा करने के लिए प्रेरित किया. वह 17 साल की उम्र में लोरेटो की सिस्टर्स में शामिल हो गईं और उन्हें कलकत्ता भेज दिया गया जहाँ उन्हें एक हाई स्कूल में पढ़ाया.उन्हें टीबी हो गया और उन्हें दार्जिलिंग में आराम करने के लिए भेज दिया गया. दार्जिलिंग जाने वाली ट्रेन में ही उन्हें बुलावा आया - जिसे उन्होंने ईश्वर का "आदेश" कहा कि कॉन्वेंट छोड़कर गरीबों के बीच काम करना और रहना है. उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि उन्हें ननों का एक संघ स्थापित करना है, या यह भी नहीं पता था कि उन्हें कहाँ सेवा करनी है. ट्रेन में बिताए उस पल को याद करते हुए उन्होंने एक बार कहा था, "मुझे पता था कि मेरा स्थान कहाँ है, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वहाँ कैसे पहुँचना है."
बुधवार, 27 अगस्त 2025
कोलकाता : मदर टेरेसा का 26 अगस्त को 115 वीं जन्म जयंती
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