- राजघाट पर 7 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है जलस्तर, प्रशासन अलर्ट,चेतावनी स्तर की ओर बढ़ते हालात से सहमें कछारवासी
लोगों में भय का माहौल
गंगा के बढ़ते पानी ने पुरानी बस्तियों में रहने वालों की धड़कनें तेज कर दी हैं। कंहैयालाल नाविक (राजघाट) ने बताया कि पानी हर घंटे ऊपर चढ़ रहा है। नाव घाट से बंधी रह गई हैं। रोज़ी-रोटी ठप हो गई। पता नहीं कब तक घर से बाहर रहना पड़ेगा। ज्वाला देवी (मच्छोदरी निवासी) का कहना है कि पिछली बार की बाढ़ का डर अभी निकला भी नहीं था कि फिर से वही हालत बन रहे हैं। बच्चों को लेकर कहां जाएं, यही सोचकर दहशत में हैं। संजीव गुप्ता (घाट किनारे फूल बेचने वाले) ने बताया कि पूजा-पाठ रुक गया है, दुकानदारी बंद हो गई है। अगर पानी और बढ़ा तो घर भी खाली करना पड़ेगा। नाजिमा (आदमपुर निवासी) ने बताया कि गली-गली में पानी भरने लगा है। बच्चे बीमार हो रहे हैं, खाना बनाने तक की दिक्कत है। पिछली बाढ़ की तरह अब फिर डर सताने लगा है। गीता देवी (बलुआघाट निवासी) का कहना है कि हर बार सबसे पहले गरीबों की बस्ती डूबती है। हम लोग हमेशा की तरह सबसे ज्यादा संकट में हैं। गोविंद दास (पंचगंगा घाट) निवासी पुरुषोत्तम का कहना है कि गंगा की लहरें सीढ़ियों पर चढ़ चुकी हैं। दुकान बंद करनी पड़ी है। कमाई का सहारा खत्म हो गया।
प्रशासन अलर्ट
जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी किया है। राहत दल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को सक्रिय किया गया है। नगर निगम ने बाढ़ प्रभावित बस्तियों में पीने के पानी और अस्थायी आश्रय स्थल की व्यवस्था शुरू की है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, बिजली सुरक्षा, और राहत सामग्री तैनात की जा रही है।
कछारवासियों का दर्द
कछार में रहने वाले परिवार झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहते हैं। गंगा चढ़ते ही सबसे पहले इन्हीं की बस्तियां जलमग्न हो जाती हैं। पशुधन और घर-गृहस्थी को बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। नाव बंद होने से नाविकों की रोज़ी-रोटी चौपट हो गई। महिलाओं को चूल्हा-चौका चलाने और बच्चों को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी चिंता। प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे अस्थायी राहत शिविर ही इनका एकमात्र सहारा हैं।
अब और पहले
वर्तमान (जुलाई 2025) 15 जुलाई 2025 ्68.43 मीटर सभी 84 घाट डूब गए थे, नाव सेवा बंद, धार्मिक गतिविधियां बाधित हुईं
1978 का महाबाढ़ सितंबर 1978 ्73.90 मीटर गंगा चेतावनी से ्2 मीटर ऊपर बह रही थी, नंगवा, संकटमोचन, अस्सी आदि इलाकों में बाढ़, बीएचयू तक कट गया था
1978 की बाढ़ इतिहास की सबसे भीषण रही, लगभग 2 मीटर ज़्यादा पानी बहा था।
जुलाई 2025 की घटना अपेक्षाकृत कम गंभीर थी, लेकिन धार्मिक आयोजनों और पर्यटन पर प्रभाव पड़ा।
वर्तमान (26 अगस्त) का जलस्तर अभी भी चेतावनी से नीचे है, मगर तेजी से बढ़ने वाला पानी हमें 1978 जैसी विपत्ति की ओर ले जा सकता है।
हिदायत
संकट की इस घड़ी में सावधानी अत्यंत आवश्यक है; अफ़वाहों पर भरोसा न करें, प्रशासन और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें।


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