- रूढ़ियों को तोड़ सीखी फोटोग्राफी कला, बनी पहली महिला प्रोफेशनल फोटोग्राफर
सपनों को पंख दिए माता-पिता ने
मनीषा बताती हैं जब मैंने शुरुआत की तो कई लोगों ने कहा कि यह लड़कियों का काम नहीं है। फोटोग्राफी में इधर-उधर घूमना पड़ता है। लेकिन मुझे बचपन से ही आर्ट्स से लगाव था, इसलिए मैंने अपने पैशन को दबाया नहीं। माता-पिता के सहयोग ने मुझे सपनों को उड़ान दी। उन्होंने शुरूआत में छोटे छोटे में काम करके की और धीरे-धीरे वेडिंग फोटोग्राफी की ओर रुझान बढ़ा।
जुनून से बनाया करियर
गुरव समाज के हेमंत मोराने ने बताया कि बालिका मनीषा ने फोटोग्राफी को करियर बनाने का ठान लिया। पूरे एक साल तक बिना शुल्क लिए कड़ी मेहनत और संघर्ष कर इस कला को सीखा। आज मेहनत और लगन के दम पर वे खंडवा की पहली महिला पफोटोग्राफर के रूप में जानी जाती हैं। टपाल चाल निवासी मनीषा का नाम अब शहर के नामी फोटोग्राफरों में शामिल है।
पिता ने दिया हौसला
मनीषा के पिता भरत सवनेर बताते हैं हमारे घर में बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है। हालांकि फोटोग्राफी जैसी फील्ड लड़कियों के लिए आसान नहीं होती, लेकिन हमने रूढ़ियों को तोड़ते हुए उसे करियर बनाने की आज़ादी दी। मनीषा वेडिंग, कैंडिड, आउटडोर और इनडोर सभी तरह की फोटोग्राफी करती हैं। यही नहीं, वह एक बेहतरीन स्पोर्ट्स वूमेन भी हैं। बास्केटबॉल और बॉक्सिंग में उन्होंने मेडल जीते हैं, साथ ही जिम ट्रेनर भी हैं। इसके बावजूद उनकी सबसे बड़ी रुचि फोटोग्राफी ही रही है। आज वे अपने हुनर से न केवल माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। विश्व फोटोग्राफी दिवस पर खंडवा की इस प्रतिभाशाली बेटी पर पूरा शहर गर्व कर रहा है।

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