- व्यक्ति को मृत्यु और भगवान का स्मरण जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण देता : महंत उद्वावदास महाराज
भागवत कथा के तीसरे दिन राजा परीक्षित को मोक्ष मिलने की कथा सुनाई और बताया कि शुकदेव जी और राजा परीक्षित के मिलन के बाद राजा को भागवत कथा का अमृत पान कराते हैं। इस कथा को सुनकर राजा परीक्षित का मन भौतिक संसार से हट जाता है और उन्हें जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है, जिसके बाद वे मोक्ष प्राप्त करते हैं। भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के मन के विकार दूर हो जाते हैं और सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। महाराज परीक्षित की कथा का वर्णन करते हुए महंत ने कहा कि वह कलिकाल के प्रभाव से ऋषि के गले में मरे हुए सर्प की माला डालने से श्राप ग्रसित हो गए थे। भागवत कथा श्रवण से ही राजा परीक्षित परम गति को प्राप्त हुए।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें