सीहोर : सात दिवसीय भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, आज लगाया जाएगा छप्पन भोग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 3 सितंबर 2025

सीहोर : सात दिवसीय भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, आज लगाया जाएगा छप्पन भोग

  • भगवान कृष्ण ने पूतना का किया उद्धार-जगदगुरु पंडित अजय पुरोहित

Bhagwat-katha-sehore
सीहोर। भगवान कृष्ण को जान से मारने के तमाम प्रयास जब राजा कंस के निष्फल रहे तो उसने राक्षसी पूतना को भेजा। पूतना को यह अभिमान था कि वह जहरीला दूध पिलाकर भगवान को मौत की नींद सुला देगी। हालांकि इसके पीछे भी भगवान का ही वरदान रहा, जिसमें उन्होंने पूतना को राक्षस योनि से मुक्ति दिलाने को कहा था। इस आशीर्वाद का ही असर रहा कि पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान उसका वध कर उद्धार करते हैं। पूतना वासना और माया का प्रतीक हैं। उक्त विचार ग्राम छतरपुर में जारी सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के दौरान जगदगुरु पंडित अजय पुरोहित ने कहे। बुधवार को कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं के अलावा नंद उत्सव का वर्णन किया।  भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला अत्यंत ही अनुकरणीय हैं। इनकी बाल लीला से हमें जीवन में आगे बढ़ने की सीख मिलती हैं। गुरुवार को भोपाल लोकसभा सांसद आलोक शर्मा, सीहोर विधानसभा विधायक सुदेश राय सहित अन्य मौजूद रहेंगे।


जगदगुरु पंडित श्री पुरोहित ने कहाकि द्वापर युग में राक्षसी एक पूतना थी, जिसनें दूध मुंहे बच्चे कृष्ण के साथ घात किया था, किंतु आज कलयुग में विभिन्न स्वरूपों में पूतना विद्यमान है। आज नारी गर्भावस्था शिशु को मार रही है। इसी मन की कुवृत्ति, स्वभाव का नाम पूतना है। मन में मलिनता आए, मन के बिगड़ने से संपूर्ण जीवन बिगड़ जाता है, यही पूतना का रूप है। बालकों के साथ जो घात करे वही पूतना है। यमुना के पानी को कालिया नाग ने जहर से प्रदूषित कर दिया था, जिसका मर्दन श्रीकृष्ण ने किया। द्वापर में भगवान कृष्ण ने जल संरक्षण एवं प्रदूषण रहित करने का जो कार्य किया वह आज हमें भी वही कार्य अपनाना चाहिए और गंदगी डालकर नदियों को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। पंडित श्री  पुरोहित ने कहा कि कंस ने नवजात शिशुओं का वध करने के लिए जिन असुरों को नियुक्त किया था उनमें पूतना सबसे प्रधान थी। पूतना इच्छानुसार रूप बनाकर दिन-रात अबोध बच्चों का वध करती हुई घूमा करती थी। श्रीकृष्ण की षष्ठी के दिन ही नंदबाबा के मथुरा चले जाने के बाद पूतना ब्रज में पहुंची। उसने देखा कि बलवान गोप प्रत्येक द्वार पर पहरा दे रहे हैं अत: उसने अपने को सुन्दर स्त्री बना लिया। उसकी चोटियों में बेला-चमेली के फूल गुंथे थे। सुन्दर वस्त्र पहने थी। उसके कानों के कर्णफूल की चमक आभूषणों की झंकार करती, हाथ में एक कमल लेकर उसे नचाती हुई पूतना जब चली तो ऐसा प्रतीत हुआ कि साक्षात् लक्ष्मीजी अपने पति को देखने के लिए आई हों। पूतना का तन सुन्दर है पर मन मैला है। बाहर से प्रेम का आडम्बर है पर मन में बैर-भाव है। रूप तो उसने पत्नी व मां का धारण किया है पर मन में मारने की दुर्वृत्ति है। पूतना का सौंदर्य, श्रृंगार, बात करने का ढंग और उसकी शान-शौकत देखकर यशोदामाता ने सोचा कि यह कोई भले घर की स्त्री है इसलिए उन्होंने कोई विरोध नहीं किया और वह सीधे नंदभवन में चली गई। भगवान की ही लीलाशक्ति ने उसे अन्य किसी घर में जाने से रोककर नंदभवन में जाने की प्रेरणा दी। भगवान ने विष पिलाने आई पूतना का वध किया।


कोई टिप्पणी नहीं: