सीहोर : यहां महाअष्टमी हवन में हर श्रद्धालु दे सकेगा आहुति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 29 सितंबर 2025

सीहोर : यहां महाअष्टमी हवन में हर श्रद्धालु दे सकेगा आहुति

  • 51 दीपों संग होगी महानिशा आरती का अद्भुत आयोजन

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सीहोर। नवरात्रि का पावन पर्व अपने अंतिम चरणों की ओर अग्रसर है और मां दुर्गा के दरबार में भक्ति व आस्था का महासागर उमड़ पड़ा है। सीहोर की मंडी स्थित मां गौरी मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु अपनी आस्था का दीप जलाकर मातारानी के चरणों में नतमस्तक हो रहे हैं। प्रतिदिन होने वाली विशाल और महाआरती में शामिल होकर भक्त धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं और अपनी मनोकामनाओं को मां के चरणों में समर्पित कर रहे । माता मंदिर के भव्य रूप देने के लिए यहां भव्यता के साथ डेकोरशन किया गया है और आकर्षक लाइट भक्तों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। आगामी 30 सिंतबर को महाअष्टमी और 01 अक्टूबर को नवमी के अवसर पर मंदिर परिसर का दृश्य और भी भव्य होने जा रहा है। महाअष्टमी पर विशेष हवन यज्ञ का आयोजन होगा, जिसमें प्रत्येक श्रद्धालु को निशुल्क आहुति देने का सौभाग्य मिलेगा। मां के दरबार में यह अवसर हर भक्त के लिए अद्वितीय है, क्योंकि स्वयं अपने हाथों से यज्ञ की आहुति अर्पित करना भक्तों के लिए परम सुख और आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। वहीं नवमी पर होने वाली पूर्णाहुति में भी कोई भी भक्त शामिल होकर दिव्य ऊर्जा का अनुभव कर सकेगा।


51 दीपों से सजकर होगी महानिशा आरती

मंदिर समिति के प्रमुख महेश तिवारी ने बताया कि महाअष्टमी की रात 12 बजे से महानिशा आरती का शुभारंभ होगा। यह आरती 51 दीपों की पंक्तियों से संपन्न की जाएगी। दीपों की दिव्य ज्योति जब मां के दरबार में जगमगाएगी, तब वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम दिखाई देगा। यह दृश्य हर भक्त के लिए अविस्मरणीय अनुभव बनकर रहेगा।


प्रतिदिन बदलता मां गौरी का श्रृंगार

नवरात्रि के इस पावन पर्व पर मां गौरी का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। प्रतिदिन मां का नया रूप भक्तों को दर्शन देकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर रहा है। कहते हैं कि जो भी सच्चे मन से मां के चरणों में शीश झुकाता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। इसी आस्था से प्रेरित होकर दूर-दूर से भक्त यहां पहुंच रहे हैं और मां के दरबार में अपनी प्रार्थनाएं अर्पित कर रहे हैं।


आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक

नवरात्रि का यह भव्य आयोजन केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है। मां दुर्गा के चरणों में समर्पण का यह अनोखा उत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहा है। नवरात्रि के ये पावन क्षण हर भक्त के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश लेकर आएंगे।

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