सीहोर : नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी की सवारी कर धरती पर आएगी : पं. शर्मा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 9 सितंबर 2025

सीहोर : नवरात्रि में मां दुर्गा हाथी की सवारी कर धरती पर आएगी : पं. शर्मा

  • इस बार 10 दिवसीय होगा अश्विन नवरात्रि पर्व 

Navratri-sehore
सीहोर। इस वर्ष अश्विन मास  नवरात्रि का शुभारम्भ 22 सितम्बर सोमवार  उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र से प्रारंभ होगा जिसका समापन 1 अक्टूबर बुधवार को होगा। इस तरह नवरात्रि का पावन पर्व इस बार 10 दिनों तक मनाया जाएगा, दस दिवसीय  नवरात्रि पर्व के अंतर्गत  सर्वार्थसिद्धी योग, भी रहेगा। नवरात्रि पर्व को लेकर पंडित सुनील शर्मा ने बताया की वर्ष में चार नवरात्रि होती है इसमें 2 प्रकट  प्रत्यक्ष नवरात्रि चैत्र मास व अश्विन मास में होती है तथा अप्रत्यक्ष गुप्त नवरात्रि माघ मास व आषाढ मास में होत्री है।  नवरात्रि में साधक  साधनाए अपने घर मंदिर  व अपनी व्यवस्थानुसार एकांत मे करते है। इस बार मां दुर्गा की कलश स्थापना सोमवार को होगी अर्थात आश्विन नवरात्रि में मां दुर्गा गज अर्थात हाथी की सवारी  कर  धरती पर आएगी। गज सवारी समृद्धि उन्नति व अच्छी बारिश की प्रतीक है जिससे संपूर्ण देश में धन्य धान्य की वृद्धि होगी l  नवरात्रि में साधक अपनी आध्यत्मिक व मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते है।


मां भगवती के नौ रूपों की होगी पूजा 

अश्विन  मास नवरात्रि में माँ दुर्गा के नो स्वरूपों की पूजा होगी जिसमें माँ शैलपुत्री मां ब्रह्मचारिणी माँ चंद्रघंटा  माँ कुष्मांडा माँ स्कंदमाता माँ कात्यायनी माँ कालरात्रि माँ महागौरी माँ सिद्धिदात्री   की साधना भक्तों के द्वारा की जाती है।  नवरात्रि में शिव शक्ति की साधना सभी मनोकामनाए पूरी करती है। इस समय की जाने वाली साधना को गुप्त बनाये रखना चाहिए। इस शक्ति साधना के पीछे एक गुप्त रहस्य है। मानव के समस्त रोग दोष व कष्टो के निवारण के लिए नवरात्र से बढ़कर कोई साधना नही होती है।  नवरात्रि के साधनाकाल में शिव शक्ति का जप तप ध्यान करने से साधक का जीवन मंगलमय हो जाता है।


नवरात्रि पूजा विधि संबंध में पंडित सुनील शर्मा ने बताया की शास्त्रों में घट स्थापना, अखंड ज्योत प्रज्जवलित करना व जावरे स्थापित करने का उल्लेख किया गया है। श्रदालुजन अपने सामर्थ्य अनुसार  उपरोक्त कार्य करते है। आश्विन मास  नवरात्रि के समय अन्य नवरात्रि की तरह ही साधक को पूजा ध्यान करना चाहिए। नौ दिनों का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा प्रथम दिवस घट स्थापना करना चाहिए, घट स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह शाम शिव शक्ति व भैरव महाराज की पूजा करनी चाहिए। नवमी के दिन कन्या पूजन भोजन व हवन के साथ नवरात्र पूर्ण करना चाहिए। पूर्णाहुति हवन मां दुर्गा के मंत्रों व दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से सम्पन्न करना चाहिए।  नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती दुर्गा चालीसा का पाठ करने से शिव शक्ति  प्रसन्न होकर साधक की मनोकामनाऐं पूर्ण करती है।  

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