पटना : “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 30 सितंबर 2025

पटना : “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”

Patna-catholic
पटना, (आलोक कुमार).“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” – इस वाक्य का साक्षात रूप है कैथोलिक मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी. आज से ठीक सौ वर्ष पहले, 30 सितंबर 1925 को वाशिंगटन डी.सी. में डॉ. अन्ना डेंगेल ने जो बीज बोया था, वह आज सेवा, करुणा और समर्पण का विशाल वृक्ष बन चुका है. डॉ. डेंगेल का दर्द उस समय से जुड़ा है, जब रावलपिंडी में उन्होंने मुस्लिम महिलाओं और नवजात शिशुओं को स्त्री रोग संबंधी सेवाओं के अभाव में मरते देखा.यह पीड़ा उन्हें विवश कर गई कि स्त्रियों की सेवा, चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक ऐसी सोसाइटी बने, जो जाति, धर्म और लिंग से ऊपर उठकर केवल मानवता के लिए काम करे. भारत की धरती से उनका रिश्ता भी बेहद खास रहा.1939 में पटना सिटी की पादरी की हवेली में जब उनका स्वागत “होली फैमिली” कहकर किया गया, तब उन्होंने उसी नाम से माइनर हॉस्पिटल की नींव रख दी. यही अस्पताल आगे चलकर कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के रूप में मानव सेवा का केंद्र बना. दिलचस्प तथ्य यह भी है कि यहां नर्सिंग ट्रेनिंग प्राप्त करने वालों में मदर टेरेसा जैसी महान आत्मा भी शामिल थीं.


मिशन सिस्टर्स ने केवल अस्पताल ही नहीं खोले, बल्कि “मानवता की मशाल” को फैलाने का अभियान छेड़ा. दिल्ली के ओखला में 1953 का होली फैमिली हॉस्पिटल, रांची के मंदार और कोडरमा के अस्पताल, मुंबई और पूना के मिशन केंद्र—ये सब उनके अथक परिश्रम के प्रतीक हैं. उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र रहा – न्याय, शांति और करुणा. हालांकि बीते दशकों में कई संस्थानों का प्रबंधन अन्य संगठनों को सौंपना पड़ा. मंदार का नर्सिंग स्कूल अब कॉन्स्टेंट लिवेन्स स्कूल ऑफ नर्सिंग बन गया है, मुंबई का अस्पताल उर्सुलाइन ऑफ मैरी इमैक्युलेट के पास है, वहीं दिल्ली और झारखंड के अस्पताल भी नए हाथों में चले गए.लेकिन मिशन सिस्टर्स का योगदान किसी इमारत से नहीं, बल्कि उस भावना से मापा जाता है जिन्होंने समाज में बोई. आज भी सिस्टर नशा मुक्ति केंद्रों, वैकल्पिक चिकित्सा केंद्रों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी हुई है. समग्र उपचार मिशन और आयुष्य सेंटर जैसी पहलें उसकी सेवा-पथ की नई दिशाएं खोल रही हैं. सौ साल पूरे होने पर हमें याद रखना चाहिए कि यह संस्था केवल ईंट-पत्थर की इमारतों का नाम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता की परंपरा है. डॉ. अन्ना डेंगेल ने जिस आग को सौ साल पहले जलाया था, वह आज भी सिस्टरों के समर्पित जीवन में उजाला फैलाती है. आज का दिन सिर्फ एक संस्थान की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस विचार की पुनः स्मृति है कि – समाज में असली धर्म वही है, जो मानव सेवा से जुड़ा हो.डॉ. अन्ना डेंगेल को नमन, और कैथोलिक मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी को उनकी शताब्दी पर हार्दिक बधाई!

कोई टिप्पणी नहीं: