मुख्य अतिथि प्रमंडलीय आयुक्त कौशल किशोर ने अपने संबोधन में कहा कि "पूर्व में कृषि से लोग सहजता से अपनी जीविका चला लेते थे, किंतु वर्तमान समय में भूमि की उर्वरता, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की कमी जैसी कई चुनौतियाँ सामने हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीक के प्रयोग से ही संभव है। यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएँ, तो कृषि को एक उद्योग के रूप में स्थापित किया जा सकता है।" उन्होंने मिथिला की परंपरा और स्वागत-संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि "मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर और यहाँ के लोगों का आत्मीय व्यवहार उन्हें अभिभूत कर गया है।" अति विशिष्ट अतिथि डॉ. संदीप तिवारी, प्राचार्य DCE दरभंगा, ने अपने वक्तव्य में कहा कि "तकनीकी शिक्षा और कृषि का गहरा समन्वय है। आज आवश्यकता है कि किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक शोध से जुड़ें। स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित उपकरण और डेटा एनालिटिक्स से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।" उन्होंने यह भी घोषणा की कि DCE दरभंगा और कृषि विज्ञान केंद्र मिलकर नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के लिए साझेदारी करेंगे। इस पहल से एक ओर विद्यार्थियों को वास्तविक कृषि समस्याओं पर शोध और समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को सीधे तौर पर नई तकनीकों का लाभ मिलेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र एवं SK चौधरी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष डॉ. संत कुमार चौधरी ने कहा कि "आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। कृषि में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों के समावेश से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।" राज्य परामर्शदात्री सदस्य श्री उज्ज्वल कुमार ने कहा कि "मिथिला की संस्कृति में कृषि केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। युवा पीढ़ी को आधुनिक कृषि से जोड़ना आज की मांग है, ताकि रोजगार और नवाचार के नए अवसर सृजित हों।" कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने एक स्वर से कहा कि यदि उत्तर बिहार की उपजाऊ भूमि और जलवायु का वैज्ञानिक पद्धतियों से उपयोग किया जाए, तो यह क्षेत्र आत्मनिर्भर बनकर न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।

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