- भारी बारिश और बादल फटने से जनजीवन अस्तव्यस्त
- राइजिंग स्टार कोर के जवानों ने जीता लोगों का दिल
नई दिल्ली, (विजय सिंह)। जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार कठुआ में विगत कई दिनों से भारी बारिश और बादल फटने की वजह से हुए भूस्खलन से काफी नुकसान होने की सूचना मिल रही है I "लाईव आर्यावर्त" को मिली जानकारी के मुताबिक कई लोगों ने अपने घर खो दिए और जनजीवन पूरी तरह से अस्तव्यस्त हो गया हैI हालांकि संकट की इस घड़ी में भारतीय सेना के जवानों ने अपनी मानवता, संवेदनशीलता और साहस का सामंजस्य बनाकर जिस तरह से तेज राहत कार्यों से बाढ़ प्रभावित लोगों के चेहरे पर संकट की परिस्थिति में भी मुस्कान लौटाने का सार्थक प्रयास किया है, उससे हमेशा की तरह एक बार फिर यह सिद्ध हो गया कि हमारी सेना ना सिर्फ सीमा पर देश के दुश्मनों के मंसूबों को परास्त करने का शौर्य प्रदर्शित करती है, बल्कि देश के भीतर भी संकट की घड़ी में देशवासियों के चेहरे पर मुस्कान लाने का हुनर भी जानती है।
जब लगातार बारिश, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने कठुआ जिले को तबाह कर दिया, जीवन रेखाएँ काट दीं और गाँव निराशा में डूब गए, तब भारतीय सेना ने निराशा और आशा के बीच एक मजबूत पुल बन कर लोगों के जीवन में नई उम्मीदों का संचार किया । दिलुआन, मंजली, पराला, जमालपुर और बिज्जत में, जहाँ पानी ने परिवारों को तबाह कर दिया था और अनिश्चितता का साया मँडरा रहा था, राइजिंग स्टार कोर के भारतीय सैनिकों ने साहस और करुणा के साथ राहत कार्य को अंजाम दिया।। सेना की जेसीबी मशीनों ने दो दिनों तक दिन-रात काफी मेहनत करके जलमग्न इलाकों में रास्ता बनाया और मलबे से भरे रास्तों को साफ कर उन जगहों पर भी रास्ता बनाया, जहाँ पहले कोई रास्ता नहीं था। सैनिकों के फौलादी सेवाभावी दिल से निर्देशित, इन लोहे के मशीनों ने तबाही के बीच राहत के द्वार खोल प्रभावित लोगों को नई शक्ति प्रदान करने में सफलता पायी। मिली जानकारी के मुताबिक लगभग 200 परिवारों के 650 पुरुष, महिलाएँ और बच्चों की जिंदगी रातोंरात संकट से घिर गई थी लेकिन संकट की इस बेला में सेना हर दरवाजे पर खड़ी थी। सेना ने ना सिर्फ भोजन, पीने का साफ पानी लोगों को मुहैया कराया अपितु बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों के लिए चॉकलेट भी देकर उनके चेहरे पर हंसी लाने में सफल रहे। बाढ़ प्रभावित इस राहत अभियान ने सेना के शाश्वत चरित्र को पुन: दोहराया है: मिशन के लिए हमेशा तैयार, जनता सर्वोपरि। कठुआ के बाढ़ त्रस्त गाँवों में, सैनिकों ने सिर्फ़ रसद ही नहीं पहुँचाई बल्कि उन्होंने लोगों का सम्मान बहाल किया और निराश परिवारों को जीवन की लय लौटाने में सफलता पायी।
ताजा जानकारी के अनुसार, धीरे -धीरे पानी कम हो रहा है, लेकिन सेना राहत कार्य के मिशन में मजबूती से डटी हुई है। संसाधन तैयार हैं, सैनिक प्रतिबद्ध हैं, और सेवा का जज्बा अडिग है। देशवासियों का भरोसा है कि जहाँ रास्ते खत्म होते हैं और विकट परिस्थिति होती है, वहाँ भारतीय सेना पहुँचती है - न केवल इस्पात की ताकत के साथ, बल्कि हर भारतीय के लिए अपने धड़कते दिलों के साथ। सिविल प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसडीआरएफ टीमों के साथ मिलकर सेना के राइजिंग स्टार कोर के जवानों ने फंसे परिवारों को सुरक्षित निकाला और उन्हें भोजन, पानी तथा अस्थायी आश्रय मुहैया कराया. सेना की मेडिकल टीम जरूरतमंदों को प्राथमिक उपचार दे रही है जबकि इंजीनियरिंग टीम मशीनों की सहायता से रास्ते खोलने और संपर्क मार्ग बहाल करने के काम में जुटी हुई है। जानकारी मिली कि सेना के हेलिकॉप्टर भी राहत कार्यों में लगाए गए हैं और गंभीर रूप से घायल लोगों को एयरलिफ्ट कर पठानकोट के सेना अस्पताल में पहुंचाया गया है I दूरदराज के कटे हुए इलाकों तक जरूरी राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान हवाई मार्ग से पहुंचाया जा रहा है। इस बीच कठुआ जिले के बाणी से सांप्रदायिक सौहार्द से आगे इंसानियत के एक सजीव प्रकरण की जानकारी प्राप्त हुई है। यहां एक हिंदू परिवार के मुखिया सुभाष ने बाढ़ में अपना घर खो चुके अपने एक मुस्लिम पड़ोसी जावेद अहमद के परिवार को अपने घर में शरण दी। जावेद के परिवार के साथ ही सुभाष के इस निर्णय की स्थानीय विधायक रामेश्वर सिंह ने भी काफी तारीफ की है।



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