- लाखों किसानों की जमीन, रोजी-रोटी और पर्यावरण पर सीधा हमला, किसानों को मिले जमीन के बदले जमीन
- पीरपैंती का किया दौरा, माले महासचिव के नेतृत्व में उच्चस्तरीय जांच दल ने स्थिति का किया आकलन
यहां 40-50 साल के पुराने पेड़ मौजूद हैं. लेकिन प्रशासन कहता है कि ये पेड़ 2011 के बाद लगाए गए. अब मोदी जी से यह सवाल करना होगा कि वे माँ के नाम पर पेड़ लगाते हैं या अडानी के नाम पर पेड़ कटवाते हैं? अडानी का पावर प्रोजेक्ट नया रोजगार नहीं देगा, बल्कि मौजूदा रोजगार छीन लेगा और पूरे इलाके की हवा, पानी और जमीन को जहरीला बना देगा. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के स्थानीय विधायक लोगों को डराकर विरोध न करने के लिए दबाव डाल रहे हैं और कह रहे हैं कि विरोध करने पर लोगों को जेल में डाल दिया जाएगा. इसके उद्घाटन के दिन मुखिया दीपक सिंह को जेल भेज दिया गया था और कई लोगों को नजरबंद कर दिया गया था. किसानों पर जमीन खाली कराने का दबाव डाला जा रहा है. इस तरह के डराने-धामकाने की साजिश का जवाब दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि कहलगाँव में एनटीपीसी का पावर प्लांट पहले से है, जहां जमीन गंवाने वाले बहुत कम लोगों को रोजगार मिला है. लोग प्रदूषण की मार झेल रहे हैं. गोड्डा की भी ऐसी ही स्थिति है - वहां कोयला ऑस्ट्रेलिया से आता है और बिजली बांग्लादेश को जाती है. झारखंड के लोगों को भी कुछ नहीं मिला. पूरे इलाके को खनन-ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से घेर कर बर्बाद करने की योजना चल रही है. यहां कोल ब्लॉक और गैस पाइप लाइन की भी चर्चा चल रही है. पीरपैंती की उपजाऊ जमीन अडानी को सौंपना विकास नहीं, विनाश का सौदा है. यह सौदा किसानों की खेती, बागानों और पूरे इलाके की जिन्दगी पर सीधा हमला है.
प्रमुख बिन्दु
1. एनटीपीसी के नाम पर 2010 में 7 पंचायतों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई. अचानक 15 वर्षों के बाद यह जमीन अडाणी को दे दी गई. किसानों का कहना है कि जमीन उन्होंने बिहार सरकार को दी थी अडाणी को नहीं.
2. मुआवजे में तीन तरह की अनियमितताएं हैं. (क) एक ही मौजा, खाता, खेसरा की जमीन के लिए अलग-अलग दर पर मुआवजा दिया गया है. (ख) जिन किसानों ने जमीन खरीदी थी लेकिन कागज नहीं बना पाए थे, उन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा. मामला कोर्ट में लंबित है (ग) कई लोगों को कोई भी मुआवजा नहीं मिला है. मुआवजे में ताकतवार लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है जबकि गरीबों को सही से मुआवजा नहीं मिला.
3. कमालपुर टोले में विस्थापित होने वाले परिवारों का आरोप है कि इतने कम मुआवजा में वे कहां जमीन खरीदेंगे? सरकार उन्हें मकान बनाकर जमीन के बदले जमीन दे. यहां तकरीबन 64 घर विस्थापित किये जाएंगे, उन्हें लगातार नोटिस भेजी जा रही है.
5. आम के बगीचे साल में 7 महीने लाखों लोगों के रोजगार का माध्यम है. इन सभी लोगों की आजीविका का साधन छीन जाएगा.
6. पहले से कार्यरत कहलगांव, गोड्डा और अब पीरपैंती का पावर प्लांट पूरे इलाके के पर्यावरण को नष्ट कर देगा.
कटाव पीड़ितों की समस्याओं से भी हुए रूबरू
पीरपैंती जाने के क्रम में गंगा कटाव पीड़ितों ने भी अपनी व्यथा सुनाई. कहलागंव प्रखंड के किसनदासपुर पंचायत के रानी दियारा के 2 वार्ड (वार्ड नंबर 12 एवं 13) और पीरपैंती के रानी दियारा पंचायत के रानी दियारा गांव के 10 वार्ड 2016 में ही गंगा में बह गए. ये सभी लोग पिछले 10 साल से रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन अभी तक इनका स्थायी पुनर्वास नहीं हो सका है. कई लोगों ने शिकायत की कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया. सरकार इन सभी लोगों का तत्काल स्थायी पुनर्वास करे.

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