- पंचवटी वृक्षों की छांव में विराजती मां दुर्गा
फतेहपुर (शीबू खान)। जनपद के सैदाबाद स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर को सिद्धपीठ माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि श्रद्धाभाव से दर्शन करने मात्र से उनके कष्टों का निवारण हो जाता है। दूर-दराज से भक्त पूरे वर्ष यहां दर्शन, हवन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर को 'पंचवटी' के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां आम, पाखर, गूलर, नीम और बरगद जैसे पांच पवित्र वृक्ष एक साथ मौजूद हैं। इन वृक्षों की छांव में भक्तों को विशेष शांति का अनुभव होता है। परिसर में मां दुर्गा सहित नौ देवियों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त, एक नौ ग्रह मंदिर भी बना है, जहां श्रद्धालु ग्रह दोष निवारण के लिए यज्ञ और हवन कराते हैं। मंदिर में उपस्थित ब्रह्मसर जी महाराज ने बताया कि मंदिर प्रांगण में ऐसे विशेष वृक्ष लगे हैं जो 27 नक्षत्रों से जुड़े दोषों और कष्टों को दूर करते हैं। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु पूर्ण आस्था से नंगे पैर मंदिर आकर भ्रमण करता है, उसके जीवन से नक्षत्रों के कारण आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। परिसर में आंवला, कटहल, महुआ और चंदन जैसे कई अन्य पेड़ भी हैं। विशेष रूप से महुआ को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना गया है, और शास्त्रों में इसकी पूजा देवी की पूजा के समान बताई गई है। मंदिर के वर्तमान महंत दीपेश्वरानंद महाराज पिछले 16 वर्षों से यहां सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह सिद्धपीठ सैकड़ों साल पुराना है और इसकी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। उनसे पहले महंत मार्कण्डेय मुनि महाराज ने 35 वर्षों तक यहां तपस्या की थी। उन्होंने ही मंदिर और आश्रम को वर्तमान स्वरूप प्रदान किया। महंत मार्कण्डेय मुनि ने अपना पूरा जीवन मंदिर की सेवा में समर्पित कर दिया और 2 जनवरी 2010 को उन्होंने देह त्याग दी।

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