वाराणसी : धान की दिव्य महक में सजा अन्नपूर्णा महोत्सव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 27 नवंबर 2025

वाराणसी : धान की दिव्य महक में सजा अन्नपूर्णा महोत्सव

  • श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में 17-दिवसीय व्रत-अनुष्ठान का पावन समापन, मां का धान-बाली श्रृंगार बना आकर्षण
  • धान की बाली से सजे श्रृंगार ने भक्तों को दिया समृद्धि और शुभता का संदेश, व्रत समापन पर काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। . काशी - आस्था, परम्परा और आध्यात्मिकता का त्रिवेणी संगम। इसी दिव्य भूमि पर बुधवार को, माँ अन्नपूर्णा के 17-दिवसीय विशेष व्रत-अनुष्ठान का भव्य समापन ऐसे हुआ मानो स्वयं अन्न-देवी ने अन्नपूर्ण कृपा का कोष खोल दिया हो। धाम में मंड़राती धूप, मंत्रों का कंपन और श्रद्धा से भीगे जन-मन, सब मिलकर एक अनूठी आध्यात्मिक अनुभूति रच रहे थे। माँ अन्नपूर्णा के विग्रह का श्रृंगार आज विशेष था, धान की बाली से सज्जित वह अलौकिक रूप, मानो प्रकृति के हृदय से निकली समृद्धि की कविता हो। धान की सुगंध से महकता पूरा परिसर कृषि-धर्म और अन्न-संस्कृति का विस्तार बन गया। ऐसा लगा, जैसे हर बाली जीवन के प्रति कृतज्ञता और शस्य-शामला धरती की धड़कन सुनवा रही हो।


श्रद्धालु इस अवसर पर केवल दर्शन करने नहीं आए थे, बल्कि अपनी आत्मा को समृद्ध करने, अपने जीवन में शुभता और सौभाग्य का आमंत्रण देने आए थे। माँ के समक्ष विसकमक हाथों में अनेक भाव, कृतज्ञता, प्रार्थना, संकल्प और आशा, सब एक साथ उमड़ पड़े। हर भक्त के हृदय में एक ही कामना... “माँ, हमारे जीवन में अन्न की कमी न हो, समृद्धि की धारा अविरल बहे।” काशी विश्वनाथ धाम में ऐसे आयोजन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं होते, बल्कि संस्कृति और लोकजीवन का विराट उत्सव बन जाते हैं। यहाँ अन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन-धर्म है, और अन्नपूर्णा केवल देवी नहीं, बल्कि पालन-पोषण की सनातन शक्ति हैं। यही कारण है कि धान की बाली से सजा यह आयोजन खेती-किसानी की गरिमा, भारतीय आत्मा की जड़ें और लोकसमृद्धि का संदेश दूर-दूर तक प्रसारित करता है। काशी के पवित्र प्रांगण में आज का दिन केवल व्रत का समापन नहीं, बल्कि अन्न-मंगल, परम्परा और जनकल्याण के भावों का महोत्सव बनकर दर्ज हुआ। माँ अन्नपूर्णा की कृपा इसी तरह समस्त जनमानस पर बनी रहे, यही काशी की चिरंतन कामना है।

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