- बिजली सार्वजनिक सेवा है, इसे लाभ कमाने की वस्तु बनाना न तो सामाजिक न्याय के अनुकूल है और न ही अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक
होने वाले विरोध प्रदर्शन में प्रमुख मांगें होंगी, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण तत्काल रोका जाए। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस लिया जाए। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद की जाए। मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताएं रद्द की जाएं। किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। वाराणसी में कल हुए पूर्व-प्रदर्शन सभा को कई वरिष्ठ इंजीनियरों और पदाधिकारियों ने संबोधित किया। मंच से ई. मायाशंकर तिवारी, ओ.पी. सिंह, ई. एस.के. सिंह, अंकुर पांडेय, ज्योति प्रकाश, सतीश बिंद, संदीप कुमार, राजेश सिंह, जयप्रकाश, योगेंद्र कुमार, धर्मेंद्र यादव, एस.के. सरोज, उदयभान दुबे, मनोज जैसवाल, मनोज यादव सहित कई वक्ताओं ने निजीकरण को देशहित व जनहित के विरुद्ध बताया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बिजली सार्वजनिक सेवा है, इसे लाभ कमाने की वस्तु बनाना न तो सामाजिक न्याय के अनुकूल है और न ही अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक। वक्ताओं के अनुसार बिजलीकर्मियों का संघर्ष अब केवल कर्मचारियों की नौकरी बचाने का आंदोलन नहीं रहा, बल्कि यह किसानों, मजदूरों और देश के आम उपभोक्ताओं का आंदोलन बन चुका है। इसी कारण संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियनों ने भी बिजलीकर्मियों के साथ कंधा मिलाकर आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। 14 दिसंबर को दिल्ली में सभी राष्ट्रीय संगठनों की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। आज होने वाला प्रदर्शन निजीकरण विरोधी इस आंदोलन में सबसे बड़ा और निर्णायक माना जा रहा है। बिजलीकर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को रद्द नहीं करती, तब तक संघर्ष रुकने वाला नहीं है। वाराणसी सहित पूरे प्रदेश में बिजलीकर्मियों का यह उफान सरकार के लिए गंभीर संदेश है कि सार्वजनिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने का विरोध अब जनचेतना बन चुका है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें