पटना : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना का नवम दीक्षांत समारोह आयोजित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 24 नवंबर 2025

पटना : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना का नवम दीक्षांत समारोह आयोजित

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पटना (रजनीश के झा)। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय का नवम् दीक्षांत समारोह 24 नवंबर 2025, सोमवार, को सम्राट अशोक कंन्वेंशन सेंटर, बापू सभागार, पटना में आयोजित किया गया। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान जी ने की। इस समारोह में राज्यपाल बिहार के प्रिंसिपल सेकेट्ररी श्री राबर्ट एल चोंग्यू भी बतौर अतिथि शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में दो हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को उपाधि दी गई। इनमें 63 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी दिया गया। इस दौरान 67 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। बिहार सरकार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री पियूष अग्रवाल को विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई। महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान ने दीक्षांत समारोह में उपाधि धारण करने वाले सभी शोधार्थी-विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत है शिक्षांत नहीं, ज्ञान अर्जन के लिए सदैव जागरूक एवं प्रयासरत रहना चाहिए एवं स्वाध्याय निरंतर जारी रखना चाहिए तथा अर्जित ज्ञान का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। मेरी आशा है कि आप सभी जिस भी क्षेत्र में जाएँ, अपने कार्य को पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करें। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्र अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ रहा है। लडकियों द्वारा सर्वाधिक स्वर्णपदक हासिल करने पर महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति महोदय ने सभी को बधाई दी और अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की।


ज्ञान के हर विधा में प्रचुर ज्ञान उपलब्ध हों जो भारत को विकसित करने में अपना योगदान दे सके। ज्ञान विज्ञान के साथ-साथ संस्कार भी आवश्यक है जो आत्मनियंत्रण एवं आत्मसंयम से प्राप्त हो सकता है। मनुष्य का श्रेष्ठतम धर्म ही आत्मनियंत्रण है। इस संदर्भ में उन्होंने वृहदारण्यक उपनिषद् में वर्णित आकाशीय ध्वनि 'दा दा दा' को उद्धृत किया गया जिसका तीन अर्थ है, यथाः- दमयत् (आत्म नियंत्रण), दान एवं दया जो ईश्वर द्वारा प्रदत् सभी प्राणियों के लिए दिव्य ज्ञान है। उनके द्वारा आगे कहा गया कि धर्म वही है जो आपने में संवेदना जागृत करे ताकि आप दूसरे की पीड़ा को समझ सके। माननीय कुलाधिपति महोदय द्वारा हितोपदेश के शूक्त अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ को उद्धृत करते हुए बताया गया कि अपना और पराया की गणना छोटे विचार वाले करते हैं। उदार हृदय वालों के लिए सम्पूर्ण धरती ही परिवार है। ज्ञान तबतक सार्थक नहीं है जबतक वह हमारे जीवन एवं कार्यों में परिलक्षित नहीं हो। प्राचीन समृद्ध संस्कृति का गर्व महसूस करना ही काफी नहीं है। हमारा जीवन तभी सार्थक होगा जब हमारा वर्तमान एवं भविष्य अतित से ज्यादा समृद्ध हो। महात्मा गांधी एवं सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के अनुरूप भेदभावरहित, करूणायुक्त संवेदनशील समाज के सर्वांगीण विकास में अपना सार्थक योगदान दें।


इस अवसर पर राज्यपाल सह कुलाधिपति महोदय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के स्त्रोंतो वेद और उपनिषदों से श्लोंको का उद्धृत करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति किसी भी आत्मा में परमात्मा स्वरूप देखती है एवं महिला और पुरूष के बीच भेद नहीं किया गया है। भारत विश्व के अग्रणी लोकतांत्रिक देशों में है जहां महिलाओं को मताधिकार दिया गया। महिला एवं पुरुषों के बीच भेदभाव भारतीय संस्कृति के विपरीत है। महिला सशक्तिकरण केवल नीतिगत नहीं अपितु आस्था का केन्द्र है। अंत में उनके द्वारा सभी छात्र-छात्राओं को आह्वान किया गया कि संयम सेवा समर्पण भाव से अपना योगदान करें जिससे कि सभी प्राणी सुखी रहें। माननीय कुलपति प्रो डॉ शरद कुमार यादव ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य "सत्य धर्माय दृष्टये" का स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2010 में अपनी स्थापना के बाद से, खास तौर पर तकनीकी शिक्षा को सुव्यवस्थित तथा नियमित करने में विश्वविद्यालय ने प्रतिबद्धता दिखाई है। हमारे विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षण, अनुसंधान और रचनात्मक प्रयासों के माध्यम से वैश्विक मानकों की उच्च शिक्षा प्रदान करना है। ज्ञान और मानवीय समझ का विस्तार करने और समाज की चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय ने उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण सृजित किया है। हमारा कैंपस तकनीकी, व्यावसायिक तथा गैर-पारंपरिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक सभी सुविधाओं से युक्त है।


माननीय कुलपति ने बताया कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना द्वारा बिहार में स्टेम सेल तकनीक के अध्ययन एवं शोध के लिए स्कूल की स्थापना की गई है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान शिखर खगोल विज्ञान यानी एस्ट्रोनॉमी का अध्ययन अध्यापन प्रारंभ किया गया है। इन दोनों स्कूलों में विश्वस्तरीय संसाधन और तकनीक उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है। साथ ही इन संस्थानों से विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग-समझौते कर विद्वानों को विश्वविद्यालय से जोड़ा जा रहा है। माननीय कुलपति ने कहा कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना द्वारा अपनी स्थापना के उद्देष्यों की प्राप्ति हेतु लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। यह विदित है कि वर्तमान में विश्वविद्यालयों की रैंकिंग उनके द्वारा प्रदान की जा रही डिग्री पर ही निर्भर नहीं है, अपितु उनके द्वारा शोध एवं विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदानों का आधार प्रमुख है। अतः विश्वविद्यालय द्वारा स्कूल ऑफ नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ स्टेम सेल टेक्नोलॉजी, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्कूल ऑफ फिलॉसफी, स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी, स्कूल ऑफ ज्योग्रफिकल स्टडीज, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन तथा स्कूल ऑफ रिवर स्टडीज में शिक्षण में उत्कृष्टता तथा खोज की प्राप्ति एवं नवीन विधाओं के क्षेत्र में प्रगति का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, विश्वविद्यालय द्वारा प्राचीन एवं अन्य नवीन विधाओं में ज्ञान की खोज एवं प्रसार तथा उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु लगातार प्रयास किया जा रहा है ताकि विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के मूल उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल हो सके ।

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