सीहोर : भैरव अष्टमी पर भंडारे का आयोजन, विप्रजनों का लिया आशीर्वाद - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 13 नवंबर 2025

सीहोर : भैरव अष्टमी पर भंडारे का आयोजन, विप्रजनों का लिया आशीर्वाद

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सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी शहर के छावनी स्थित प्राचीन भैरव मंदिर में आस्था और उत्साह के साथ काल भैरव जी का जन्मोत्सव मनाया गया, रात्रि को महा आरती के पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया और इसके उपरांत यहां पर कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया गया था। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं के द्वारा समाजसेवी श्रीमती अरुणा राय का सम्मान किया गया। छावनी स्थित बड़ा बाजार-चरखा लाइन स्थित मंदिर में श्रद्धालु समाजसेवी संजय सोनी और रामेश्वर सोनी के द्वारा यहां पर साफ-सफाई के अलावा नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अलावा भैरव बाबा का भंडारा किया जाता है। आयोजन समिति के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि भैरव नामावली और भैरवाष्टक का पाठ आदि का आयोजन किया गया। काल भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार की नकारात्मकता और बुरी शक्तियां दूर होती हैं। भगवान भैरव के बटुक भैरव, महाकाल भैरव और स्वर्णाकर्षण भैरव प्रमुख रूप हैं। इनमें से भक्त बटुक भैरव की ही सर्वाधिक पूजा करते हैं। तंत्रशास्त्र में अष्ट भैरव का उल्लेख भी मिलता है-असितांग भैरव, रूद्र भैरव, चंद्र भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत भैरव, कपाल भैरव, भीषण भैरव और संहार भैरव। काल भैरव अष्टमी है और इस दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है या भैरव मंदिर में जाकर भैरव की पूजा होती है। काल भैरव को भगवान शिव का अवतार बताया जाता है, जिन जातकों की कुंडली में राहु ग्रह बक्री चल रहा है या नकारात्मक फल दे रहा है तो इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए काल भैरव की आराधना करना चाहिए. भैरव की आराधना से साल भर के लिए लौकिक और पारलौकिक विघ्न टल जाने से साधक की आयु बढ़ेगी. साथ ही तांत्रिक प्रयोग भी नष्ट हो जाते हैं। भगवान शिव के दो रूप हैं भैरवनाथ और विश्वनाथ। पहला रूप भैरवनाथ का पापी, धर्मद्रोही और अपराधियों को दंड देने वाला है। दूसरा रूप विश्वनाथ जगत की रक्षा के लिए माना गया है। भैरव के दिन रविवार तथा मंगलवार माने जाते हैं।  


तीन तरह के गुण बताए गए हैं-सत्व, रज और तम

उन्होंने बताया कि शास्त्रों में कुल तीन तरह के गुण बताए गए हैं-सत्व, रज और तम। इन तीन गुणों से मिलकर ही सृष्टि की रचना हुई है। शिव जी इन तीनों गुणों के स्वामी हैं। शास्त्रों में अनेक  भैरव बताए हैं। इन तीनों गुणों के अलग-अलग तीन भैरव बटुक, काल और आनंद हैं।

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