उत्पीड़न दर उत्पीड़न
बिजली कर्मियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए, 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों को आंदोलन समर्थन के चलते हटाया गया. फेशियल अटेंडेंस के नाम पर हजारों का वेतन महीनों रोका गया, महिलाओं सहित कई कर्मियों का मनमाना दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर, संघर्ष समिति पदाधिकारियों पर डिस्प्रोपोर्शनेट एसेट का झूठा मुकदमा, चेयरमैन की वीसी का बहिष्कार करने पर 87 विद्युत अभियंताओं को चार्जशीट, प्रमोशन रोका, मार्च 2023 आंदोलन के बाद की दमनात्मक कार्रवाइयांकृऊर्जा मंत्री के आदेश के बाद भी वापस नहीं, वक्ताओं ने कहा कि प्रबंधन निजीकरण थोपने के लिए इस तरह के दबाव दे रहा है, पर कर्मी झुकने को तैयार नहीं।
प्रीपेड मीटर का विरोध तेज
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली कर्मियों व पेंशनरों की रियायती बिजली सुविधा समाप्त करना चाहती है। इसके लिए उनके घरों पर जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। समिति ने कहा कि “यह उत्पीड़न का नया तरीका है, जिसका पुरजोर विरोध जारी रहेगा।”
दमन बढ़ेगा तो संघर्ष और प्रचंड होगा : समिति का संदेश
वक्ताओं ने कहा कि एक वर्ष से लगातार सड़क पर उतरने के बावजूद बिजली कर्मियों का मनोबल कम नहीं हुआ है। समिति का स्पष्ट संदेश, निजीकरण रुके बिना यह आंदोलन नहीं रुकेगा, भले कितने ही वर्ष बीत जाएं। सभा की अध्यक्षता ई. शैलेन्द्र दुबे और संचालन अंकुर पाण्डेय ने किया। सभा को ई. शैलेन्द्र दुबे, अजय सिंह, ई. मायाशंकर तिवारी, ओ.पी. सिंह, राजेन्द्र सिंह, ई. पुष्पेन्द्र सिंह, वंदना पाण्डेय, सतीश बिंद, उदयभान दुबे, निखिलेश सिंह, जिउतलाल, राजेश सिंह, गिरीश यादव, जितेन्द्र यादव, रामाशीष सिंह, कृष्णा सिंह, रामकुमार झा, सुनील कुमार, जे.पी.एन. सिंह, ई. सौरभ मिश्रा, निरंजन सिंह, अनिल कुमार सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।

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