पटना : भोजपुरी फिल्म ‘बकलोल्स’ का टीज़र गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हुआ रिलीज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 12 नवंबर 2025

पटना : भोजपुरी फिल्म ‘बकलोल्स’ का टीज़र गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल में हुआ रिलीज

  • दिसंबर में ‘स्टेज’ ओटीटी पर होगी रिलीज

Film-baklol
पटना (रजनीश के झा)। गाज़ीपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भोजपुरी सिनेमा को एक महत्वपूर्ण फिल्म ‘बकलोल्स’ का टीज़र लॉन्च हुआ। यह फिल्म देसी अंदाज़, ज़मीनी हंसी और मानवीय भावनाओं के संगम से बुनी गई है। दर्शकों को यह कहानी दिसंबर में ‘स्टेज’ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देखने को मिलेगी। यह फिल्म ओटीटी स्टेज ओरिजनल द्वारा रिलीज होगी। बात अगर ‘बकलोल्स’ की करें तो इसकी कहानी, स्क्रीनप्ले और म्यूज़िक जाने-माने लेखक सत्य व्यास ने लिखा है, जबकि फिल्म का निर्माण सिद्धार्थ आर यश ने किया है और निर्देशन निशांत सी शेखर ने संभाला है। फिल्म में मनोज टाइगर, रवि शर्मा, इंदर सिंह, अशोक मांझी, हर्षिता उपाध्याय और रिया नंदनी जैसे कलाकारों ने अपनी अदाकारी से कहानी में जान फूंक दी है।


फिल्म निर्माताओं ने बताया कि ‘बकलोल्स’ पूर्वांचल के युवाओं की ज़िंदगी, उनके संघर्ष, सपनों और समाज की वास्तविकता को सहज हास्य के माध्यम से बयां करती है। यह उस आम इंसान की कहानी है जो सपने देखता है, ठोकरें खाता है, फिर भी मुस्कुराकर जीवन को जीता है।  फिल्म में प्रमुख भूमिका निभा रहे अभिनेता मनोज टाइगर ने फिल्म को लेकर कहा कि “यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा के लिए एक ताज़ा हवा का झोंका है। इसमें न तो बनावटीपन है, न फूहड़पन। बल्कि इसमें गाँव की मिट्टी की खुशबू है, वहाँ के लोगों की सादगी है और जीवन का असली हास्य है। ‘बकलोल्स’ दिखाती है कि भोजपुरी सिनेमा सिर्फ गानों और एक्शन तक सीमित नहीं है — इसमें संवेदना, संघर्ष और गहराई भी है।” ‘बकलोल्स’ युवाओं की ज़िंदगी, उनके सपनों और उनके संघर्ष को बहुत सच्चाई से दिखाती है। यह फिल्म हँसाएगी भी और सोचने पर भी मजबूर करेगी। मुझे यक़ीन है कि ‘बकलोल्स’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भोजपुरी सिनेमा में बदलाव की शुरुआत साबित होगी।” फिल्म के DOP प्रशांत चंद्रशेखर, BGM मोज़िज़ सेन और एडिटर विशाल सिंह हैं। यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा में नई सोच और संवेदनशील हास्य का संगम पेश करने जा रही है — जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करेगी। ‘स्टेज’ की प्रतिनिधि स्नेहा सिंह ने कहा, “हमारी कोशिश है कि वे कहानियाँ जो अब तक सुनी नहीं गईं, उन्हें दुनिया तक पहुँचाया जाए। ‘बकलोल्स’ उसी सोच का हिस्सा है — जो हँसी के साथ समाज की गहराई को भी छूती है।”

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