सीहोर : 3 दिवसीय उत्सव के साथ होगी मनमोहन पाश्र्वनाथ की प्रतिष्ठा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 21 नवंबर 2025

सीहोर : 3 दिवसीय उत्सव के साथ होगी मनमोहन पाश्र्वनाथ की प्रतिष्ठा

  • कस्बा क्षेत्र में एक करोड़ की लागत से सफेद मार्बल से बना श्वेताम्बर जैन मंदिर को देखने पहुॅच रहे लोग

Jain-mandir-sehore
सीहोर। सीवन नदी के किनारे सबसे ऊपर के टापू पर प्राचीन श्रीरामलीला मैदान के पास स्थित प्राचीन श्री चिंतामन पाश्र्वनाथ जैन मंदिर अब अपने नये स्वरुप में बनकर तैयार हो चुका है। राजस्थानी सफेद मार्बल से बने विशाल मंदिर में एक साथ करीब 11 जैन प्रतिमाओं की स्थापना की होगी। जिसमें मूलनायक जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पाश्र्वनाथ रहेंगे। मंदिर बनकर पूर्ण हो चुका है और इसकी सुंदरता की चर्चा पूरे नगर में है और लोग इसे देखने के लिये लोग कस्बा पहुॅच रहे हैं।


करीब 600 साल पुराना है मंदिर, तलघर में रखी थी मूर्तियॉ

कस्बे के प्राचीन श्वेतांबर जैन मंदिर में रखीं मूर्तियाँ 600 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती हैं। पास में स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भगवान शीतलनाथ की प्रतिमा पर वीर संवत 1548 लिखा हुआ है, जिससे उसकी प्राचीनता स्पष्ट होती है। वहीं मंदिर में रखी कुछ धातु की प्रतिमाओं पर दर्ज संवत से पता चलता है कि वे लगभग 1000 साल पुरानी हैं। करीब 150 साल पहले मुगलों के हमलों से मूर्तियों को बचाने के लिए श्वेतांबर जैन मंदिर और आसपास के अन्य मंदिरों में बड़े प्रयास किए गए थे। उस समय इस मंदिर के अंदर नीचे तलघर बनाया गया था, जिसमें सभी मूल प्रतिमाएं सुरक्षित रख दी गई थीं और पूजा भी वहीं की जाती थी। पेशवाकाल में मंदिर वापस व्यवस्थित हुआ था, उसकी पुरानी बनावट की शैली में पेशवाकाल की झलक स्पष्ट नजर आती थी।


करीब एक करोड़ से बनकर तैयार हुआ है मंदिर

प्राचीन श्वेताम्बर जैन मंदिर का जीर्णोद्धार मालवा के जैनसंत आचार्य नवरत्न सागर जी म.सा. ने कराने का संकल्प लिया था। विगत लम्बे समय से यहॉ निर्माण कार्य जारी है। आचार्य विश्वरत्न सागर जी म.सा. के प्रयासों से लगभग एक से डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च किया गया है। मंदिर बहुत ही विशाल और ऊॅचा बनाया गया है। इसमें कुछ स्थानों पर मकराना सफेद मार्बल का भी उपयोग किया गया है। रंगमंडप में जमीन पर लगे मार्बल के ऊपर रंग-बिरंगे पत्थरों से बेल बनाई गई है। पूरे मंदिर में पत्थरों पर बारीक नक्काशी से अनेक चित्र उकेरे गये हैं। यहॉ मनमोहन पाश्र्वनाथ के अलावा जीरावाला और अंतरिक्ष पाश्र्वनाथ की प्रतिमाएं भी स्थापित होंगी।


अहमदाबाद के भूषण भाई का रहा विशेष सहयोग

अहमदाबाद के भूषण भाई ने इस मंदिर को पूर्णरूप देने में विशेष सहयोग दिया है। भूषण भाई अब तक 160 से अधिक मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा में सम्मिलित हो चुके हैं और वहॉ हर तरह का सहयोग भी दे चुके हैं। सीहोर के प्राचीन जैन मंदिर में भी उनके अनुभव और सहयोग से आगामी 28 से 30 नवम्बर तक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न होगा।

कोई टिप्पणी नहीं: