- मोदी की गंगा सत्ता की गंगा है, लोगों की आस्था की गंगा नहीं
- श्रम कोड भी अडानी के लिए, हिडमा की हत्या भी अडानी के लिए.
- महिलाओं को झांसा देकर वोट लिया गया, हमारी लड़ाई जारी है
जैसे ही बिहार का चुनाव जीत लिया, मोदी जी ने कहा कि गंगा बिहार से बंगाल की ओर बढ़ेगी. मोदी की गंगा सत्ता की गंगा है, लोगों की आस्था की गंगा नहीं. इसे लेकर वे बंगाल जाएंगे. चार श्रम कोड देश पर थोप दिए गए. 26 नवंबर संविधान दिवस है और 2020 में इसी दिन ऐतिहासिक किसान आंदोलन शुरू हुआ था. तब, पूरे देश के मजदूर दो दिन हड़ताल पर थे. उसी संघर्ष का परिणाम था कि वे कानून वापस लेने पड़े. बिहार चुनाव के नतीजे आते ही चारों श्रम कोड लागू कर दिए गए - जिसमें 8 घंटे का काम 12 घंटे का कर दिया गया. हड़ताल करना लगभग असंभव बना दिया गया. काम की कोई सुरक्षा नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि ये श्रम कोड काम की सुरक्षा के लिए हैं. बेसिक पे 50 प्रतिशत कर दिया गया. 26 नवंबर को इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन का आह्वान किया गया है. इसे सफल बनाएं. 18 नवंबर को खबर आई कि माओवादी नेता हिडमा की हत्या कर दी गई. माओवादियों की लगातार हत्याएं हो रही हैं. बहुत सारे नेता सरेंडर कर रहे हैं. लेकिन हिडमा-जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी मूल से आकर जल-जंगल-जमीन की हिफाजत के लिए अडानी की लूट के खिलाफ लड़ रहे थे-उन्हें मारने से पहले उनके घर जाकर उनकी बूढ़ी मां से बयान दिलवाया गया. मां ने अपील की कि बेटा घर लौट आए. लेकिन उसे घर लौटने नहीं दिया गया - उसकी हत्या कर दी गई. पूरा बस्तर रो रहा है. यह सब क्या है? श्रम कोड भी अडानी के लिए, हिडमा की हत्या भी अडानी के लिए.
गैर-भाजपा राज्यों में क्या हो रहा है? तमिलनाडु में कोई भी बिल पास हो जाए, गवर्नर हस्ताक्षर नहीं करते. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गर्वनर कुंडली मारकर नहीं बैठ सकते. या तो हस्ताक्षर करो या राष्ट्रपति को भेजो. अब 14 नवंबर के बाद सुप्रीम कोर्ट भी कह रहा है कि गवर्नर स्वतंत्र है. आज देश के संघीय ढांचा व लोकतंत्र खतरे में है. मजदूरों-किसानों के अधिकार, महिलाओं की आजादी खतरे में है. हम लोग लड़ते हुए इसका मुकाबला कर रहे हैं. यह निश्चित है कि यदि अंग्रेजों को भगाना संभव था - जब दुनिया भर में उनकी तूती बोलती थी - तो आज की इस तानाशाही को रोकना भी संभव है. चुनाव में जो भी हुआ - वह अपनी जगह है. उसे समझेंगे. वोटचारी-सीनाजोरी के खिलाफ लड़ेंगे. चुनाव में महिलाओं का गलत इस्तेमाल किया गया. उन्हें झांसा देकर वोट लिया गया. फिर से सामाजिक उत्पीड़न बढ़ रहा है. बुलडोजर राज उभर रहा है. इसे भी रोकेंगे. अडानी की लूट को भी रोकेंगे. हमारे हर कदम में विशेश्वर प्रसाद यादव जिंदा रहेंगे. श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ किसान नेता केडी यादव, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, किसान महासभा के राज्य सचिव उमेश सिंह सहित राज्य व जिला के कई नेता शामिल हुए. विदित हो कि चुनाव के दौरान सुपौल में काम करते हुए का. विशेश्वर प्रसाद यादव की अचानक मौत हो गई थी. वे मूलतः वैशाली के रहने वाले थे, जबकि चुनाव में सुपौल का काम देख रहे थे.

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