- पूर्वांचल को मिली बड़ी राहत, गंभीर ट्रॉमा मरीजों की सर्जरी अब बिना अगले दिन का इंतजार, 15 दिसंबर से लागू नई व्यवस्था
क्यों जरूरी था ओटी समय बढ़ाना
ट्रॉमा सेंटर आने वाले गंभीर मामलों में शाम 6 बजे के बाद सबसे अधिक भीड़ रहती है। पॉलीट्रॉमा, कम्पाउंड फ्रैक्चर, डिसलोकेशन, वैस्कुलर इंजरी और हेड इंजरी के उन मामलों में, जहां ऑर्थो इनवॉल्वमेंट रहता है, समय पर सर्जरी जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक कारक होती है. रात 10 बजे तक ओटी खुला रहने से, गंभीर मरीजों की सर्जरी अब उसी दिन हो सकेगी। संक्रमण, रक्तस्राव व अंग कटने जैसी आशंकाओं में भारी कमी आएगी। इमरजेंसी विभाग का दबाव घटेगा, ट्राइएज बेहतर होगी। घायल मरीजों के लिए स्वर्णिम समय (गोल्डेन अवर्स ) का अधिकतम लाभ मिलेगा।
सीधे लाभ, मरीज, परिजन और सिस्टम सभी के लिए फायदे
1. रात में लाए गए ट्रॉमा मरीजों को तुरंत सर्जरीः विशेषकर पॉलीट्रॉमा, ओपन फ्रैक्चर व वैस्कुलर इंजरी में देरी जोखिम बढ़ाती थी।
2. सर्जरी अगले दिन टलने से मुक्ति : इससे न सिर्फ मौत का खतरा कम होगा, बल्कि रिकवरी भी तेजी से होगी।
3. लिंब-सेविंग प्रक्रियाओं में सफलता बढ़ेगीः जटिल फ्रैक्चर व धमनी चोटों में समय पर हस्तक्षेप अंग बचाने में गेमचेंजर साबित होता है।
4. इमरजेंसी विभाग पर बोझ कमः गंभीर मरीजों को रोके रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जगह खाली होगी और नए केसों का प्रबंधन बेहतर होगा।
5. रिसोर्स मैनेजमेंट मजबूतः दिनभर की ओटी लोड बैलेंसिंग होने से सर्जिकल सिस्टम अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनेगा।
6. शिक्षा व प्रशिक्षण के नए अवसर : ऑर्थोपेडिक रेजिडेंट्स, फेलोज और नर्सिंग स्टाफ को वास्तविक ट्रॉमा केसों का अनुभव बेहतर मिलेगा।
व्यवस्था लागू करने के लिए पूरा संस्थान सक्रिय
प्रो. सौरभ सिंह ने बताया कि ऑर्थोपेडिक विभाग, एनेस्थीसिया, नर्सिंग यूनिट, तकनीकी स्टाफ और प्रशासनिक इकाइयों को विस्तारित शिफ्ट में कार्य करने के लिए तैयार किया गया है। समर्थन सेवाएं, रेडियोलॉजी, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी लैब, आईसीयू को भी रात तक समन्वय में रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी गंभीर मरीज की सर्जरी बिना किसी बाधा के हो सके।
नई व्यवस्था 15 दिसंबर 2025 से ऐसे लागू होगी
ओटी संचालन समयः सुबह 8ः00 बजे से रात 10ः00 बजे तक
इमरजेंसी सर्जरी के लिए समर्पित टीम
सपोर्ट सर्विसेज का भी विस्तारित सहयोग
किसी भी गंभीर केस को बिना देरी सर्जरी की प्राथमिकता

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