- श्रीमद्भागवत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सार है : जगत गुरु पंडित अजय पुरोहित
उन्होंने कहा कि गोकर्ण ने भी अपने पिता आत्मदेव को श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उपदेश दिया था। राजा परीक्षित के बारे में विस्तार बताया, राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म, कपिल संवाद का प्रसंग सुनाया। शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वनों में काफी दूर चले गए। उनको प्यास लगी, पास में समीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे और बोले ऋषिवर मुझे पानी पिला दो मुझे प्यास लगी है, लेकिन समीक ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि इसने मेरा अपमान किया है मुझे भी इसका अपमान करना चाहिए। उसने पास में से एक मरा हुआ सर्प उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने नदी का जल हाथ में लेकर शाप दे डाला जिसने मेरे पिता का अपमान किया है आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प पक्षी आएगा और उसे जलाकर भस्म कर देगा।
11 जोड़ों का एक साथ किया जाएगा अंतिम दिन निशुल्क विवाह
इस संबंध में जानकारी देते हुए श्री चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर समिति के अध्यक्ष समाजसेवी मनोहर राय ने बताया कि भागवत कथा दोपहर बारह बजे से आरंभ हो जाती है। कथा के आयोजन कर्ताओं ने सभी श्रद्धालुओं से कथा का श्रवण करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक पहल समिति के द्वारा की गई है जिसमें कथा के अंतिम दिवस सर्व जाति सामूहिक विवाह में निशुल्क रूप से 11 जोड़ों का एक साथ विवाह महोत्सव किया जाएगा। इस विवाह में सभी जाति के जोड़ों को शामिल किया जा रहा है।

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