तत्पश्चात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADSS), सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा बाल विवाह निषेध से संबंधित प्रचलित कानूनों, बाल विवाह के मामलों में प्रशासनिक एवं न्यायिक भूमिका, तथा पीड़ित बालक-बालिकाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम हेतु समय पर सूचना, त्वरित हस्तक्षेप एवं विभागीय समन्वय के महत्व पर विशेष बल दिया। तत्पश्चात बाल संरक्षण इकाई / चाइल्ड हेल्पलाइन के पदाधिकारी द्वारा बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर की जाने वाली तत्काल कार्यवाही, संरक्षण सेवाओं, काउंसलिंग, पुनर्वास तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिका पर विस्तृत टिप्पणी प्रस्तुत की गई। इसके बाद GVYT के मैनेजिंग डायरेक्टर द्वारा बाल विवाह के समाज पर पड़ने वाले व्यापक दुष्प्रभावों, जैसे—शिक्षा में अवरोध, बालिकाओं के सशक्तिकरण में बाधा, गरीबी एवं सामाजिक असमानता के दुष्चक्र को बढ़ावा मिलने जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यशाला में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सेविकाएँ, DLSA से जुड़े अधिवक्ता, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि एवं अन्य प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम सार्थक विमर्श, विभागीय समन्वय एवं सकारात्मक सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यशाला बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में मधुबनी जिले के लिए एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी पहल सिद्ध हुई।
मधुबनी (रजनीश के झा)। आज 10 जनवरी को महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार के तत्वावधान में मधुबनी जिला अंतर्गत वाटसन स्कूल सभागार में “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत 100 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत एक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), सामाजिक सुरक्षा कोषांग, स्वास्थ्य विभाग, बाल संरक्षण इकाई एवं अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से संपन्न हुई। कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास निगम के जिला परियोजना प्रबंधक द्वारा की गई। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य, बाल विवाह उन्मूलन की आवश्यकता तथा इस दिशा में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के बीच आपसी समन्वय की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, आईसीडीएस द्वारा बाल विवाह से उत्पन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं पारिवारिक दुष्परिणामों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई तथा जमीनी स्तर पर आंगनवाड़ी सेविकाओं एवं विभागीय कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।

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