कार्यक्रम के अंतर्गत 28 जनवरी 2026 से तकनीकी सत्र, नुक्कड़ नाटक, क्विज प्रतियोगिता एवं पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना निर्धारित है, जिनका उद्देश्य छात्रों के साथ-साथ आम नागरिकों तक भूकंप सुरक्षा से संबंधित संदेश पहुँचाना है। एनएसएस समन्वयक एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री जावेद अख्तर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें इस जागरूकता अभियान को सफल बनाने तथा सुरक्षा के ध्वजवाहक (Flag Bearer of Safety) बनने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक श्री अंकित, श्री विनायक झा एवं श्री असजद मोख्तार सहित अन्य शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। भूकंप जागरूकता सप्ताह के माध्यम से दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का उद्देश्य छात्रों एवं समाज में आपदा-सुरक्षित सोच विकसित करना और सुरक्षित निर्माण की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
दरभंगा (रजनीश के झा)। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) एवं विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग (DSTTE), बिहार के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, दरभंगा में 24 जनवरी 2026 से भूकंप जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया है। दरभंगा जिले को हाल ही में भूकंप जोन–6 में शामिल किए जाने के बाद इस प्रकार के कार्यक्रम की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। इस क्षेत्र में भूकंप के संभावित खतरों को देखते हुए भूकंपरोधी भवन डिजाइन, संरचनात्मक सुरक्षा एवं आम जनमानस में जागरूकता अत्यंत आवश्यक हो गई है। कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए केवल इंजीनियरिंग समाधान ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में सुरक्षा उपायों को अपनाना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से भूकंप सुरक्षा उपायों को व्यवहार में लाने तथा भविष्य के निर्माण कार्यों में भूकंपरोधी मानकों को अनिवार्य रूप से अपनाने पर बल दिया। इस अवसर पर आयोजित तकनीकी सत्र में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री ईशांत कुमार ने भूकंपरोधी संरचनाओं की तकनीकी बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मजबूत कॉलम–बीम डिजाइन, भूकंप डैम्पर एवं बेयरिंग्स की भूमिका, तथा संरचनाओं में ऊर्जा अवशोषण तकनीकों की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने पर्वतीय एवं भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में भवन एवं सड़क निर्माण के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी चर्चा की।

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