डोमोटेक्स से हेमटेक्सटाइल की ओर बदला रुख
उद्योग जगत में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के बड़े हिस्से ने पारंपरिक रूप से प्रसिद्ध डोमोटेक्स हनोवर की जगह हेमटेक्सटाइल 2026 को प्राथमिकता दी। जानकारों के मुताबिक, इसका कारण खरीदारों की बेहतर मौजूदगी, व्यापक नेटवर्किंग और होम टेक्सटाइल सेक्टर के साथ कालीन उद्योग का बेहतर तालमेल है।
खरीदारों की मजबूत दिलचस्पी, बढ़ी कारोबारी उम्मीदें
मेले के दौरान भारतीय पवेलियन में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। यूरोप, अमेरिका, पश्चिम एशिया और एशियाई देशों से आए खरीदारों ने भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों और रग्स में गहरी रुचि दिखाई। निर्यातकों के अनुसार, डिज़ाइन, सस्टेनेबिलिटी और इको-फ्रेंडली मैटेरियल्स को लेकर खास तौर पर पूछताछ हुई, जिससे आने वाले महीनों में बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना मजबूत हुई है।
भारतीय वाणिज्य दूतावास की अहम भूमिका
मेले के समानांतर फ्रैंकफर्ट स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास की ओर से बिजनेस इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किए गए। इन बैठकों में भारतीय निर्यातकों और जर्मन आयातकों के बीच सीधा संवाद हुआ। बातचीत में यूरोपीय बाजार की मांग, गुणवत्ता मानक, सस्टेनेबिलिटी और दीर्घकालिक व्यापारिक सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वैश्विक चुनौतियों के बीच जर्मनी बना भरोसेमंद बाजार
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बीच जर्मनी और यूरोप की प्रदर्शनियां भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए सालभर की बिजनेस प्लानिंग का आधार बनती जा रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि हेमटेक्सटाइल जैसे मंच न केवल ऑर्डर दिलाते हैं, बल्कि नए बाजारों की राह भी खोलते हैं। कुल मिलाकर, हेमटेक्सटाइल 2026 भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में मजबूती से खड़े रहने की रणनीतिक शुरुआत साबित हुआ है। यह आयोजन भारत की पारंपरिक कारीगरी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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