इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. अनुप दास, निदेशक, आईसीएआर–आरसीईआर, पटना; डॉ. आशुतोष उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग; तथा डॉ. उज्ज्वल कुमार, विभागाध्यक्ष, सामाजिक-आर्थिक एवं विस्तार प्रभाग आदि उपस्थित रहे।इस अवसर पर अपने संबोधन में निदेशक डॉ. अनुप दास, ने बदलती जलवायु परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता सुनिश्चित करने हेतु सतत मृदा एवं जल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के साथ प्रभावी ऑन-फार्म जल प्रबंधन से जल उपयोग दक्षता में वृद्धि, फसल उत्पादकता में सुधार तथा किसानों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित वैज्ञानिक ज्ञान को खेत स्तर तक प्रभावी रूप से पहुँचाने का आह्वान किया।डॉ. अशुतोष उपाध्याय, विभागाध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए एकीकृत भूमि-जल प्रबंधन दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई, सेंसर आधारित तकनीकें, जल का बहुआयामी उपयोग, प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, तथा मौसम आधारित निर्णय प्रणाली का समन्वय संसाधन उपयोग दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है। यह प्रशिक्षण किसानों को व्यावहारिक, किफायती और किसान-हितैषी जल प्रबंधन समाधान अपनाने में सक्षम बनाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत भूमि एवं जल प्रबंधन तकनीकें, कृषि में आईओटी एवं एआई/एमएल के अनुप्रयोग, फसल विविधीकरण, किसान-हितैषी उपकरण तथा मौसम आधारित कृषि जल प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, अनुसंधान प्रक्षेत्रों एवं मृदा प्रयोगशालाओं के भ्रमण के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।उद्घाटन सत्र के दौरान “ड्रोन तकनीक का कृषि में प्रयोग एवं फायदे” विषय पर एक हिंदी पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी, डॉ आशुतोष उपाध्याय, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. राकेश कुमार एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के सहयोग से, डॉ. सुमीत सौरभ (परियोजना निदेशक, आत्मा, समस्तीपुर) के प्रायोजन में संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ मणिभूषण, डॉ. अजय कुमार, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. शिवानी का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

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