समाजसेवी पुरुषोत्तम शर्मा ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि मादीपुर में पहली बार कुछ अच्छा होता हुआ दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई भले ही अभी अंश मात्र हो लेकिन इसे एक मजबूत शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी ही सख्ती लगातार जारी रही तो न केवल अवैध कारोबार पर रोक लगेगी बल्कि लोगों में कानून और दायित्व के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। पुरुषोत्तम शर्मा ने यह भी कहा कि वर्षों से स्थानीय लोग इन अवैध गतिविधियों से त्रस्त थे लेकिन कार्रवाई के अभाव में हालात और बिगड़ते चले गए। अब जब प्रशासन ने कदम उठाया है तो यह जरूरी है कि इसे केवल प्रतीकात्मक न रखा जाए बल्कि चरणबद्ध तरीके से पूरे क्षेत्र में अवैध निर्माण, फैक्टरियों और बिना लाइसेंस व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाया जाए। उन्होंने मांग की कि भविष्य में किसी भी प्रकार की ढील न बरती जाए ताकि दोबारा नियमों का उल्लंघन करने की हिम्मत न हो।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को राहत मिली है। कई निवासियों ने बताया कि अवैध फैक्टरियों के कारण दिन रात मशीनों का शोर रहता था और हवा में धुआं फैला रहता था। बच्चों और बुजुर्गों को सांस से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अब सीलिंग की कार्रवाई के बाद माहौल में सुधार महसूस किया जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार दिल्ली नगर निगम को लंबे समय से मादीपुर क्षेत्र में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। जांच के बाद नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। दिल्ली पुलिस ने भी कानून व्यवस्था बनाए रखने और कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो इसके लिए सहयोग किया। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस कार्रवाई को सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निष्पक्ष और निरंतर कार्रवाई करता रहा तो मादीपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार आ सकता है। फिलहाल जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह कार्रवाई केवल एक बार की पहल बनकर न रह जाए बल्कि भविष्य में भी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्ती से अमल में लाई जाए।

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