पटना : “पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि एवं जलवायु परिवर्तन” विषय पर होगा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 21 जनवरी 2026

पटना : “पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि एवं जलवायु परिवर्तन” विषय पर होगा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

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पटना (रजनीश के झा)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा दिनांक 22 से 24 जनवरी, 2026 के दौरान “पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि एवं जलवायु परिवर्तन” विषय पर तीन दिवसीय  राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन नेशनल एकेडमी ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस, नई दिल्ली तथा अटारी, पटना के सहयोग से आयोजित होगा। यह सम्मेलन देश के अग्रणी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, प्रसार विशेषज्ञों एवं प्रगतिशील किसानों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहाँ विशेष रूप से पूर्वी भारत के परिप्रेक्ष्य में जलवायु परिवर्तन के शमन एवं टिकाऊ कृषि के लिए नवाचारी समाधानों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु-सहिष्णु कृषि, टिकाऊ खाद्य प्रणालियाँ, हरित प्रौद्योगिकियाँ तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने हेतु अनुवादात्मक अनुसंधान एवं प्रसार रणनीतियों पर गहन चर्चा करना है, जिसमें पूर्वी भारत पर विशेष बल दिया जाएगा। 


उद्घाटन सत्र 22 जनवरी, 2026 को आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. इंद्रजीत सिंह, माननीय कुलपति, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना मौजूद रहेंगे । इस अवसर पर आईसीएआर संस्थानों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण संगठनों के अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन दिवस पर मुख्य व्याख्यान, राष्ट्रीय सम्मेलन नेशनल एकेडमी ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस पुरस्कार समारोह–2026, सम्मेलन स्मारिका का विमोचन तथा किसान–वैज्ञानिक–उद्योग संवाद प्रमुख आकर्षण होंगे। सम्मेलन के दौरान चार तकनीकी सत्र, पोस्टर प्रस्तुतियाँ तथा जलवायु परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकियों एवं नीति-संबद्ध विस्तार अनुसंधान से जुड़े विषयों पर केंद्रित विचार-विमर्श आयोजित किए जाएंगे। आईसीएआर संस्थानों, बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया, विश्वविद्यालयों एवं उद्योग जगत के प्रसिद्ध विशेषज्ञ अपने अनुभव, शोध निष्कर्ष एवं नवाचार साझा करेंगे। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में 150 से अधिक वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं अन्य हितधारकों की सहभागिता अपेक्षित है।

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