सीहोर : सहस्त्र चंडी महायज्ञ:सहस्त्र चंडी महायज्ञ में पांच लाख 10 हजार आहुतियां दी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 22 जनवरी 2026

सीहोर : सहस्त्र चंडी महायज्ञ:सहस्त्र चंडी महायज्ञ में पांच लाख 10 हजार आहुतियां दी

  • गुप्त नवरात्रि पर करोली माता मंदिर में देवी के नौ रुपों का किया जा रहा पूजन-अर्चन
  • देर रात्रि को किया जाता जोरदार अतिशबाजी का प्रदर्शन

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सीहोर। शहर के गंज स्थित करोली माता मंदिर में जारी दस दिवसीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ में गुरुवार को 5 लाख 10 हजार आहुतियां दी गई। यज्ञचार्य महादेव शर्मा ने बताया कि यज्ञ से निकलने वाली धुएं के वातावरण में शुद्धि आती है तथा आसपास के क्षेत्र में सुख समृद्धि पनपती है। इस मौके पर देर रात्रि को जोरदार आतिशबाजी के साथ यहां पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर माता का दरबार भक्तिमय हो गया है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पर आ रहे है। गुरुवार को 45 जोड़ों के अलावा कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर, मुख्य यजमान सूत्रधार तरुण राठौर ने यज्ञ में आहुतियां देकर क्षेत्र में सुख समृद्धि की कामना की। यज्ञ में देर शाम को बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप में सतरंगी रोशनी को देखकर आकर्षित किया। इस संबंध में महायज्ञ के मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि क्षेत्र में प्रथम अवसर है कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ का आयोजन संयुक्त मां कालका उत्सव समिति और सभी शहरवासियों की ओर से किया जा रहा है।


यज्ञाचार्य पंडित श्री शर्मा ने बताया कि मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में नवरात्रि पर शक्ति की साधना का बहुत अधिक महत्व होता है। आज के दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, दुर्गा मां के इस रूप की आराधना करने से देवी आशीष प्रदान करती हैं और सभी दुखों का नाश होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कूष्माण्डा की मुस्कान की एक झलक ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया। इन्हें अष्टभुजा देवी के रूप में भी जाना जाता है। मां कूष्माण्डा का वाहन सिंह है और आदिशक्ति की 8 भुजाएं हैं।  इनमें से 7 हाथों में कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, कमण्डल और कुछ शस्त्र जैसे धनुष, बाण, चक्र तथा गदा हैं। जबकि, आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मान्यता है कि माता को कुम्हड़े की बलि बेहद प्रिय है, वहीं कुम्हड़े को संस्कृत में कूष्माण्डा कहते हैं।  

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