स्ट्रोक के बढ़ते खतरे के बीच भरोसेमंद केंद्र
भारत में स्ट्रोक के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे समय में ग्लेनेईगल्स अस्पताल को मिली यह अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मान्यता इस बात का प्रमाण है कि अस्पताल समय पर जीवनरक्षक इलाज देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। अस्पताल की स्ट्रोक टीम में देश के वरिष्ठ विशेषज्ञ—डॉ. शिरीष हस्तक, डॉ. नितिन दांगे और डॉ. पंकज अग्रवाल, इंटरवेंशनल स्पेशलिस्ट्स और क्रिटिकल केयर डॉक्टर शामिल हैं, जो मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के रूप में हर मरीज का इलाज करते हैं। यहां इलाज के दौरान डोर-टू-नीडल टाइम और डोर-टू-ग्रॉइन टाइम पर विशेष फोकस किया जाता है, ताकि मरीज को न्यूनतम समय में अधिकतम फायदा मिल सके।
गोल्डन विंडो में इलाज, तेज़ रिकवरी की राह
ग्लेनेईगल्स अस्पताल में एक अलग न्यूरो क्रिटिकल केयर यूनिट है, जहां गंभीर स्ट्रोक मरीजों की विशेष देखभाल की जाती है। यहां स्ट्रोक के इलाज में 4.5 घंटे की “गोल्डन विंडो” को बेहद अहम माना जाता है, ताकि दिमाग को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और मरीज जल्दी सामान्य जीवन की ओर लौट सके। ग्लेनेईगल्स अस्पताल के सीईओ डॉ. बिपीन चेवले ने इस उपलब्धि पर कहा, “यह सर्टिफिकेशन हमारी पूरी टीम की मेहनत, मजबूत सिस्टम और मरीजों की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का परिणाम है। स्ट्रोक जैसे समय-संवेदनशील रोग में सही समय पर सही इलाज बेहद ज़रूरी है। मुंबई का एकमात्र अस्पताल होना जिसे यह मान्यता मिली है, हमारे लिए गर्व की बात है। हम भविष्य में भी मरीजों को बेहतर, तेज़ और संवेदनशील इलाज देने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे।”

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