सीहोर : आज मनाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुकमणी का विवाह महोत्सव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 22 जनवरी 2026

सीहोर : आज मनाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुकमणी का विवाह महोत्सव

  • श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्म पर झूम उठे श्रद्धालु

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सीहोर। शहर के प्राचीन इंदौर नाका स्थित श्री सिद्ध बटेश्वर महादेव मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में देर शाम को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा के दौरान जैसे भगवान का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान लोग झूमने-नाचने लगे। कथा के चौथे दिन कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय ने कहाकि भगवान राम और श्री कृष्ण को जन्म देने वाले माता-पिता महान है, जिन्होंने अपने जीवन को भक्ति और त्याग से प्रेरित किया है। जिसके कारण उनके परिवार में भगवान का अवतार हुआ है। भगवान राम और भगवान श्री कृष्ण का जन्म अधर्म के नाश के लिए हुआ है। सभी धर्मों में अच्छी बातें कही गई हैं। लोग किसी व्यक्ति की बात सुने या ना सुने लेकिन सभी धर्म के संदेशों को जीवन में अवश्य अपनाना चाहिए। समाज में सुधार के लिए बच्चों एवं बुजुर्गों को कथा का श्रवण करना चाहिए। क्योंकि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने वाले भक्तों को भगवान के प्रति भावना और ज्यादा बढ़ जाती है और उसकी भगवान जरूर सुनता है। जिससे उसके सारे काम बनते चले जाते हैं। जीवन मंत्र और रघुकुल के संस्कारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में हमेशा लिखे हुए कागज की तरह ही बनो, क्योंकि लिखा हुआ कागज मूल्यवान होता हैं।


कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय कलयुग में भागवत की कथा सुनने मात्र से हर प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथावाचक ने कहा कि भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिसे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है। भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है। भागवत कथा के आयोजन से श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है। जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई, चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया। वहीं शुक्रवार को भागवत कथा के पांचवे दिवस भगवान श्रीकृष्ण और माता रुकमणी विवाह महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। शहर के इंदौर नाके पर कथा एक बजे से शाम तक आयोजित की जाती है। मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं ने कथा में शामिल होने की अपील की। 

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