सीहोर : विनम्रता भाव से शीश झुकाना भी सच्ची भक्ति : कथावाचक पंडित चेतन उपाध्याय - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

सीहोर : विनम्रता भाव से शीश झुकाना भी सच्ची भक्ति : कथावाचक पंडित चेतन उपाध्याय

  • भागवत कथा में गोवर्धन पूजा, भक्तों को कर्मयोग का संदेश दिया

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सीहोर, शहर के प्राचीन इंदौर नाका स्थित श्री सिद्ध बटेश्वर महादेव मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिवस पर गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित कर उनकी आराधना की गई, जिससे पूरा पंडाल श्रद्धा और उत्साह से भर गया। इस मौके पर भगवान के द्वारा गोवर्धन पूजा के अलावा भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी के बारे में वर्णन किया गया। अब शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी विवाह महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।  


शुक्रवार को कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और अघासुर वध का वर्णन और गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर इंद्र का अहंकार तोड़ने की कथा, माखन चोरी, और कालिया नाग मर्दन का प्रसंग सुनाया, जो भक्तों को अहंकार त्यागने व कर्मयोग का संदेश देता है। भक्ति, नम्रता और विश्वास के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि ईश्वर अहंकार या वैभव से नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और पूर्ण विश्वास से प्रकट होते हैं। रामायण की प्रसिद्ध चौपाई होईह सोई जो राम रची रखा का उदाहरण देते हुए उन्होंने श्रोताओं को कर्मयोग का संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्य और सद्कर्म पूरी निष्ठा से करने चाहिए, और फल का निर्णय परमपिता परमेश्वर पर छोड़ देना चाहिए। परमात्मा के समक्ष कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। फल, पुष्प या दोनों हाथ जोड़कर विनम्र भाव से शीश झुकाना भी सच्ची भक्ति का प्रतीक है।


आत्मबोध को सरल उदाहरणों से समझाते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दही के मंथन से मक्खन प्राप्त होता है, उसी प्रकार शरीर रूपी दही का मंत्र और साधना रूपी मंथन करने से श्रेष्ठ आत्मा का प्राकट्य होता है, जो अंतत: परमात्मा में विलीन हो जाती है। उन्होंने मक्खन को आत्मिक शुद्धता और स्थायित्व का प्रतीक बताया। कथा का समापन आरती के साथ हुआ, जिसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया, जो स्थानीय सनातन परंपराओं को मजबूत करने का प्रतीक बना। गौवर्धन की पूजन आज संस्कार और प्रकृति से जोड़ने के लिए है। गो माता में भगवान का निवास रहता है। इसलिए गौ माता की सेवा करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पूजा करने का सुझाव दिया। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने भारी वर्षा की। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर मथुरा, गोकुल और वृंदावन के लोगों की रक्षा की। इंद्रदेव ने अपने घमंड के लिए क्षमा मांगी और वर्षा रुक गई। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई। कथा में गोचरण लीला, अघासुर वध, कालिया नाग पर नृत्य और चीर हरण लीला का भी वर्णन किया गया।

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