सीहोर : गोवर्धन पर्वत उठाकर श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव का कर दिया था अभिमान चकनाचूर : पं राजेश शर्मा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

सीहोर : गोवर्धन पर्वत उठाकर श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव का कर दिया था अभिमान चकनाचूर : पं राजेश शर्मा

Bhagwat-katha-sehore
सीहोर। मंगलवार को श्रीमद भागवत कथा में पंडित राजेश शर्मा ने गोवर्धन पर्वत कथा श्रद्धालुओं के प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगवान के समक्ष अभिमान अधिक समय तक चलता नहीं है बृजवासियों पर अंहकार के कारण वर्षा प्रकोप करने वाले इंद्रदेव का गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाकर श्रीकृष्ण ने अभिमान अहंकार चकनाचूर कर दिया था। भगवान केवल भाव प्रेम के भूखे है भगवान के सामने चालाकी दिखाने वालों को सुधारने के किए भगवान  लीला भी कर देते है तब हम कहते है, है भगवान हमारी मदद करों।


श्रीमद भागवत कथा सुनाते हुए पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि कृष्ण को मारने के लिए कंस द्वारा भेजे गये बकासुर राक्षस ने बगुला का रूप धारण करके कृष्ण को अपनी चोंच से पकड़ लिया। कृष्ण ने बकासुर की चोंच को पकड़ कर दोनों हाथों से फाड़ दिया था जिससे बकासुर का मौक्ष हो गया। श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को लेकर  पंडित शर्मा ने बताया कि कृष्ण के द्वारा कालिया नाग, वृर्णापूत,बकासुर,पूतना, कालिया नाग का अभिमान समाप्त कर दिया गया था। गोवर्धन पर्वत को श्रीकृष्ण ने 7 दिनों तक अपनी छोटी उंगली पर धारण कर लिया था। गोवर्धन पर्वत की दिपावली के अगले दिन पूजन का विधान है। अन्नकूत महोत्सव का आयोजन होने लगा है।


पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि भगवान से यमुना नदी में रहने वाले कालिया नाग की पत्नियों ने क्षमा मांगी और कालिया नाग के प्राणों की रक्षा की विनती की तब दीनदयाल श्री कृष्ण ने कालिया नाग को जीवनदान देकर सकुशल छोड दिया था प्रभू दयालू भी है। कंस के द्वारा भेजे गए तृर्णावत राक्षस ने बवंडर रूप धारण कर गोकुल में आधी तुफान ला दिया था तृर्णावत राक्षस ने शिशु श्रीकृष्ण को उठा लिया और आसमान में लेगया तब श्रीकृष्ण ने खुद को भारी वजनदार बना लिया था जिससे असुर की जीवन गति रुक गई। कथा श्रवण करने पहुंचे पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने पंडित राजेश शर्मा का सत्कार किया। मुख्य यजमान अनिल सक्सेना और परिजनों ने व्यासगादी का पूजना किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या मेें श्रद्धालुजन पहुंच रहे है क7था प्रतिदिन दोपहर एक से शाम चार बजे तक हो रही है। 

कोई टिप्पणी नहीं: