वाराणसी : जलवायु परिवर्तन की मार अब महिलाओं के स्वास्थ्य पर, वाराणसी में होगा राष्ट्रीय मंथन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

वाराणसी : जलवायु परिवर्तन की मार अब महिलाओं के स्वास्थ्य पर, वाराणसी में होगा राष्ट्रीय मंथन

  • मेडवेज हेल्थ फाउंडेशन का ‘शी-शील्ड कॉन्क्लेव 2026’ 28 फरवरी को, विशेषज्ञ बताएंगे रोकथाम आधारित स्वास्थ्य के उपाय

Climate-change-women-health
वाराणसी (सुरेश गांधी)। महिलाओं के स्वास्थ्य पर बढ़ते पर्यावरणीय बदलाव और जलवायु संकट के प्रभाव को लेकर वाराणसी में राष्ट्रीय स्तर का संवाद आयोजित किया जा रहा है। मेडवेज हेल्थ फाउंडेशन द्वारा 28 फरवरी को सुबह 9ः30 बजे से होटल ताज गंगेज में ‘शी-शील्ड कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य और विषय-वस्तु की विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने बताया कि यह कॉन्क्लेव महिलाओं के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियों के संबंध पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच होगा। कार्यक्रम का मुख्य विषय “पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच महिलाओं के स्वास्थ्य का भविष्य” रखा गया है, जिसमें स्वास्थ्य, सार्वजनिक नीति, सामाजिक विकास और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। प्रेस वार्ता में बताया गया कि वायु प्रदूषण, दूषित जल, बदलती जीवनशैली और पोषण असंतुलन का सीधा असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। आयरन की कमी (एनीमिया), सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर तथा हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में इलाज के साथ-साथ रोकथाम (प्रिवेंटिव हेल्थ) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।


कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित लोकगायिका मालिनी अवस्थी, तथा पद्मश्री सम्मानित कथक नृत्यांगना युगल नालिनी कामालिनी सहित कई राष्ट्रीय स्तर की हस्तियां शामिल होंगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के संदर्भ में वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन से जुड़े शोध अनुभवों तथा अकादमिक दृष्टिकोण से सेंट्रल युनिवर्सिटी आफ झारखंड के विशेषज्ञों की भागीदारी रहेगी। सामाजिक-आर्थिक आयामों पर स्वास्थ्य जागरूकता मॉडल के संदर्भ में उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक तथा कॉर्पोरेट सहभागिता के अंतर्गत एलजी इलेक्ट्रनिक से जुड़े प्रतिनिधि भी अपने विचार रखेंगे। आयोजकों ने बताया कि कॉन्क्लेव में तीन तकनीकी सत्र आयोजित होंगे, महिलाओं का समग्र स्वास्थ्य और पोषण, पर्यावरण और रोगों का संबंध, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और समाधान. प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि यदि परिवार की महिला स्वस्थ होती है तो पूरा परिवार और समाज सशक्त बनता है। इसलिए महिलाओं के स्वास्थ्य को केवल चिकित्सा तक सीमित न रखकर पर्यावरण, पोषण और सामाजिक जागरूकता से जोड़ना आवश्यक है। मेडवेज हेल्थ फाउंडेशन ने मीडिया, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों से इस महत्वपूर्ण पहल में सहभागिता का आह्वान किया, ताकि महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा सके और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य मॉडल को मजबूत बनाया जा सके। आयोजकों ने कहा कि आज स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े अस्पताल और आधुनिक तकनीक तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बीमारियों की रोकथाम पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। महिलाओं में आयरन की कमी, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करना समय की मांग है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि यदि परिवार की महिला स्वस्थ रहती है तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। इसी सोच के साथ कॉन्क्लेव में स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक संरचना के आपसी संबंध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं: