फतेहपुर : “क्या पत्रकार मजदूर भी नहीं?” — साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन की केंद्र सरकार से बड़ी मांग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

फतेहपुर : “क्या पत्रकार मजदूर भी नहीं?” — साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन की केंद्र सरकार से बड़ी मांग

  • पत्रकारों की बदहाल आर्थिक हालत पर सरकार से हस्तक्षेप की अपील
  • लोकतंत्र मजबूत करना है तो पत्रकार को मजबूत करना होगा
  • जनता की आवाज उठाने वाले खुद आर्थिक संकट में, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग 

Shibu-khan
फतेहपुर (रजनीश के झा)। देशभर के लाखों पत्रकारों की बदहाल आर्थिक स्थिति को लेकर साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (रजि.) ने केंद्र सरकार से गंभीर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान द्वारा सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार को एक मांग-पत्र भेजकर पत्रकारों को न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण देने की अपील की गई है। साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (सीजेए) के राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जिला, तहसील, ब्लॉक और ग्रामीण स्तर पर कार्यरत अधिकांश लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के प्रतिनिधि आज भी अवैतनिक रूप से काम कर रहे हैं। दिन-रात जनता की समस्याएं उठाने वाले पत्रकार स्वयं अपने परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं। उन्हें न तो किसी तरह का वेतन मिलता है और न ही सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ। एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि जब सरकार मनरेगा मज़दूर को न्यूनतम मज़दूरी और काम के घंटे तय करती है, तो 24 घंटे सामाजिक ड्यूटी करने वाले पत्रकार को कम से कम मज़दूर का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता? मांग-पत्र में प्रमुख रूप से न्यूनतम वेतन की गारंटी, ग्राम पंचायत स्तर तक सरकारी विज्ञापन एवं विज्ञापन कमीशन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा के तहत पत्रकार सहित उनके परिवार को मुफ्त स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, शिक्षा में विशेष रियायत व अन्य के साथ ही पत्रकार कल्याण कोष के माध्यम से सक्रिय पत्रकारों की आवश्यकतानुसार मदद की मांग रखी गई है। इसके आगे मार्मिक अंदाज में पत्र में यह भी कहा गया है कि जब पत्रकार की जेब खाली होती है और घर में बच्चों की भूख सामने होती है, तब निष्पक्ष पत्रकारिता करना अत्यंत कठिन हो जाता है। यदि लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है, तो पत्रकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना अनिवार्य है। साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (सीजेए) ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस “अदृश्य श्रमशक्ति” की पीड़ा को समझेगी और पत्रकारों को सम्मानजनक “मज़दूर” का दर्जा देते हुए ठोस नीति लागू करेगी।

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